अमित शाह के दौरे से बढ़ा भजनलाल शर्मा का सियासी कद
- दिल्ली में मजबूत हुई पकड़, 2028 के लिए भी मजबूत होती दिख रही मुख्यमंत्री की दावेदारी
जयपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का राजस्थान दौरा केवल विकास योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। निंबाहेड़ा और अलवर में अमित शाह के कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सक्रिय मौजूदगी ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठन के भीतर मजबूत होती स्थिति की चर्चा को हवा दी है। शाह के दौरे में प्रदेश को 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दिए जाने के साथ किसानों को आर्थिक सहायता और रोजगार उत्सव जैसे कार्यक्रम भी हुए। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हुई है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष के दौरान प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यशैली को काफी हद तक समझ लिया है। शुरुआत में उनकी कार्यशैली को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच अब सरकार के कामकाज, संगठन के साथ तालमेल और आम कार्यकर्ताओं तक सीधी पहुंच को उनकी बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली में भी मजबूत होती पकड़
भजनलाल शर्मा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जा रही है कि उन्होंने प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ लगातार बेहतर तालमेल मुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा में मुख्यमंत्री के लिए केवल सरकार चलाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के साथ भरोसे का रिश्ता भी महत्वपूर्ण होता है। भजनलाल शर्मा इस मोर्चे पर लगातार आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
बड़े नेताओं के बीच बनाई अलग पहचान
राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से कई कद्दावर नेताओं का प्रभाव रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में भजनलाल शर्मा का मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना और उसके बाद अपनी अलग पहचान बनाना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि शर्मा की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बन रही है, जो संगठन से निकलकर सत्ता तक पहुंचा है और अब सरकार तथा संगठन दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलने का प्रयास कर रहा है।
जमीनी नेता की छवि बनी ताकत
भजनलाल शर्मा की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी उनकी जमीनी नेता की छवि को माना जा रहा है। भाजपा के आम कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और आम जनता के बीच पहुंच बनाए रखने की उनकी कोशिशें उन्हें संगठन के पारंपरिक कार्यकर्ता वर्ग से जोड़ती हैं। मुख्यमंत्री का यह अंदाज भाजपा की संगठनात्मक राजनीति के अनुरूप भी माना जाता है। यही कारण है कि पार्टी के भीतर उनके समर्थकों का मानना है कि आने वाले समय में उनका राजनीतिक कद और बढ़ सकता है।
पुरानी योजनाओं को समझकर नई दिशा
सरकार के स्तर पर भी भजनलाल शर्मा सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की कई योजनाओं को जारी रखते हुए उनमें बदलाव और विस्तार करने का प्रयास किया है। साथ ही नई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, युवाओं, महिलाओं और आमजन तक लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि भाजपा के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि सरकार का अनुभव बढ़ने के साथ मुख्यमंत्री की प्रशासनिक क्षमता भी मजबूत हुई है।
ढाई साल का अनुभव, अगले ढाई साल की परीक्षा
भजनलाल शर्मा सरकार अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे कर चुकी है। अब सरकार के सामने अगले ढाई वर्ष में योजनाओं के क्रियान्वयन, रोजगार, विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर परिणाम देने की बड़ी चुनौती है। यदि सरकार अपने शेष कार्यकाल में विकास और जनकल्याण के मोर्चे पर अपेक्षित परिणाम देने में सफल रहती है, तो 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए भजनलाल शर्मा का चेहरा स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
2028 की तस्वीर अभी बाकी
फिलहाल 2028 के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर कोई अंतिम राजनीतिक फैसला नहीं हुआ है और चुनावी परिस्थितियां आगे काफी बदल सकती हैं। लेकिन वर्तमान राजनीतिक संकेतों को देखें तो भजनलाल शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी के भीतर अपनी जगह मजबूत करने में सफलता हासिल की है। अमित शाह के राजस्थान दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की सक्रिय भूमिका और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनका समन्वय इसी राजनीतिक मजबूती का एक संकेत माना जा रहा है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी नहीं होगी कि आने वाले समय में भजनलाल शर्मा को राजस्थान भाजपा के एक बड़े और प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जा सकता है। 2028 में सरकार रिपीट होगी या नहीं, इसका फैसला जनता करेगी, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां यह जरूर संकेत दे रही हैं कि भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जमीन मजबूत कर ली है और अब उनके सामने अगले ढाई वर्षों में अपने काम के जरिए इस राजनीतिक पूंजी को और मजबूत करने की चुनौती है।