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तनाव विकार और सोशल मीडिया कर रहा युवाओं को बर्बाद

तनाव विकार और सोशल मीडिया कर रहा युवाओं को बर्बाद

बाल मुकुन्द ओझा
आज की भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में काम का दबाव और समय का प्रबंधन हम पर इस कदर हावी हो चुके हैं कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य गड़बड़ा रहा है। सोशल मीडिया के बारे में यह कहा जाता है यह प्लेटफ़ॉर्म शैक्षिक मनोरंजन और ज्ञान विज्ञानं का बड़ा साधन है। वहीं यह कहने वाले भी कम नहीं है कि सोशल मीडिया की लत से यवा वर्ग मानसिक तनाव, डिप्रेशन, नींद की दिक़्क़त, ग़ुस्सा जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया के चलते बच्चों और युवाओं में सामाजिक दिखावे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। अनेक अध्ययनों में यह खुलासा हुआ है कि मानसिक तनाव का एक मुख्य कारक सोशल मीडिया भी है। सोशल मीडिया ने युवाओं को अपनी चपेट में ले लिया है। युवाओं के हाथों में हर समय मोबाइल देखा जा सकता है। दिनभर मोबाइल के प्रयोग से मानसिक स्वास्थ्य गड़बड़ाने लगा है। आज बच्चे से बुजुर्ग तक मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानसिक स्वास्थ्य को “शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कल्याण की स्थिति और न केवल बीमारी या दुर्बलता की अनुपस्थिति” के रूप में परिभाषित किया है। मानसिक स्वास्थ्य को मानसिक कल्याण के रूप में परिभाषित किया है जिसमें एक व्यक्ति अपनी क्षमताओं का एहसास करता है, जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, सही से काम कर सकता है और अपने समुदाय में योगदान करने में सक्षम होता है। इस सकारात्मक अर्थ में, मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत भलाई और एक समुदाय के प्रभावी कामकाज की नींव कहा जा सकता है मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य एक गंभीर समस्या के तौर पर देखी जाती है। आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरी हैं। एक बेहतर स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ मानसिकता अत्यंत आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है।
ऑफ़िस ऑफ़ नेशनल स्टैटिस्टिक्स [ओएनएस] के सर्वे में देशवासियों को युवाओं में थकान और तनाव को नजरअंदाज करने पर सचेत किया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि आज का युवा वर्ग 'एंग्जायटी' यानी चिंता का सबसे ज्यादा शिकार है। यह समस्या न केवल व्यक्तिगत खुशियों को छीन रही है, बल्कि इसके कारण अर्थव्यवस्था को भी करोड़ों के कार्य दिवसों का नुकसान हो रहा है। आजकल युवाओं में तनाव की समस्या को लेकर देशवासी बेहद चिंतित है। तनाव की वजह से कम उम्र में ही युवा डिप्रेशन के शिकार होने लगे हैं। खासतौर से काम करने वाले युवा यानि को नौकरी कर रहे हैं उनके अंदर ठहराव, लगन और काम के लिए पैशन बहुत कम है। जरा-जरा सी बातों पर स्ट्रेस लेने लगते हैं। हाल की में हुई एक स्टडी में भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। जिसमें 25 साल के युवा कर्मचारियों में से 90 प्रतिशत का मन और दिमाग बेचैन पाया गया है। जिसकी वजह से कई बार अपने आप को हानि पहुंचाने तक के ख्याल इनके मन में आने लगते हैं। तनाव और डिप्रेशन से बचना है तो सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है। रात में 6-8 घंटे की नींद से कई विकारों को दूर किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। इनमें शामिल हैं डिप्रेशन, अधिक तनाव, अनिद्रा, दुख, अल्ज़ाइमर रोग, भ्रम और अवसाद जैसी समस्याएं। ये समस्याएं किसी को भी हो सकती हैं चाहे वह बच्चा हो या बड़ा, महिला हो या पुरुष, किसी भी जाति, धर्म या समाज से हो। इन समस्याओं से निपटने के लिए समय पर उपचार और सही दिशा-निर्देश बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है कि आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण गुड हार्मान सेरोटोनिन का रिलीज कम हो जाता है, जो सीधे तौर पर मूड को ठीक रखने के लिए आवश्यक है। इसका हमारे शरीर पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है, रक्त प्रवाह बढ़ता है और इससे मूड सुधरने लगता है। इस स्थिति में आपमें सकारात्मक भावनाओं की कमी हो सकती है। हर दिन केवल 30 मिनट पैदल चलने से आपके मूड को बेहतर बनाने और आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। काम से समय निकाल कर हर दिन एक्सरसाइज करें। मन को शांत रखने के लिए योग बेहतरीन अभ्यास है। संतुलित आहार और भरपूर पानी पूरे दिन आपकी एनर्जी और फोकस में सुधार कर सकता है। कोल्ड ड्रिंक या कॉफी जैसे कैफीनयुक्त ड्रिंक्स का सेवन सीमित करें।

 

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