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वात्सल्य योजना के तहत आवेदन आमंत्रित

वात्सल्य योजना के तहत आवेदन आमंत्रित

बाड़मेर। जिला बाल संरक्षण इकाई बाड़मेर की ओर से देखभाल संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को पारिवारिक प्यार देने के लिए बाल अधिकारिता विभाग की ओर से वात्सल्य योजना संचालित की जा रही है। बाल अधिकारिता विभाग बाड़मेर के सहायक निदेशक राजीव सुथार ने बताया कि योजना के तहत किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत बच्चों को पारिवारिक वातावरण में पालन पोषण एवं देखरेख के लिए इच्छुक भावी पोषक माता-पिता जिला बाल संरक्षण इकाई में आवेदन प्रस्तुत कर सकते है। इस योजना के अंतर्गत जीरो से 18 वर्ष की आयु तक संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को स्थाई पारिवारिक देखरेख (दत्तक ग्रहण से अलग) उपलब्ध कराई जाएगी।

पोषक माता पिता के लिए योग्यता-
उन्होंने बताया कि कोई भी भारतीय जो दो साल से राजस्थान में निवासरत हो, कोई भी दंपति के बीच न्यूनतम दो साल का स्थाई व्यावहारिक संबंध होना चाहिए। भावी पोषक माता-पिता आयकर दाता होने चाहिए, अधिकतम संयुक्त आयु 120 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। एकल व्यक्ति महिला या पुरुष की स्थिति में न्यूनतम आयु 25 साल तथा अधिकतम 65 वर्ष से अधिक नहीं हो। पोषक माता-पिता का कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए, एकल पुरुष किसी बालिका की पालन पोषण देखने के लिए पात्र नहीं होंगे। भावी पोषक माता-पिता को आवश्यक दस्तावेजों में निर्धारित आवेदन पत्र के लिए आयु संबंधित प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आयकर रिटर्न की प्रति, चिकित्सा प्रमाण पत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट एवं दो प्रतिष्ठित लोगों की गवाही प्रस्तुत करनी होगी।

दत्तक ग्रहण से भिन्न है फोस्टर केयर-
उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण एक स्थाई व्यवस्था है जबकि फोस्टर केयर अस्थाई है जिस बच्चे की आयु 18 वर्ष की होने तक बढ़ाया जा सकता है दत्तक ग्रहण में जैविक बच्चों के समान परिवार की संपति में अधिकार सहित सभी अधिकार और कर्तव्य मिलते हैं जबकि फोस्टर केयर के मामले में ऐसा नहीं है इस प्रकार यह कारा के माध्यम से या हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटिनेस एक्ट के तहत दत्तक ग्रहण से भिन्न व्यवस्था है जिसका उद्देश्य बच्चों को पारिवारिक माहौल प्रदान करना है।

फोस्टर केयर को मिलेंगे 4 हजार प्रति बच्चा-
भाई बहन की स्थिति के अतिरिक्त अधिकतम दो बच्चे फोस्टर केयर में एक परिवार को दिए जा सकते हैं। परिवार के फोस्टर केयर बच्चों और जैविक बच्चों की कुल संख्या 5 से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिन परिवारों की वार्षिक आय आठ लाख रूपये से कम है उन्हें 4 हजार रूपये प्रति बच्चा प्रति माह दिया जाएगा। बाल अधिकारिता विभाग द्वारा फास्टर केयर के नए दिशा निर्देश जारी किए गए है। आयोग और विभाग के दिशा निर्देशानुसार 31 अगस्त तक ऐसे बच्चों और परिवारों के चिन्हीकरण का विशेष अभियान चलाया जा रहा है कोई भी जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय से संपर्क कर सकता है।

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