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सिक्किम में एवलांच, 6 टूरिस्ट की मौत, 150 लोगों के दबे होने की खबर

सिक्किम में एवलांच, 6 टूरिस्ट की मौत, 150 लोगों के दबे होने की खबर

सिक्किम. राजधानी गंगटोक में मंगलवार को एवलांच (हिमस्खलन) हुआ। इसमें 6 टूरिस्ट की मौत हो गई और 150 लोगों के बर्फ में फंसे होने की खबर है। मरने वालों में चार पुरुष, एक महिला और एक बच्चा शामिल है। यह घटना दोपहर करीब 12:20 बजे गंगटोक को नाथुला दर्रे से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर हुई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जहां पर हादसा हुआ, वहां जाने के लिए पास जारी होता है। जहां से पास जारी होता है वहां से 13 मील तक आगे जाने की परमिशन रहती है। बताया जा रहा है कि सैलानी 15 मील तक चले गए थे।
पिछले साल आए तीन बड़े एवलांच
1. जनवरी 2022: तिब्बत में एवलांच की चपेट में आने से 8 लोगों की मौत हो गई थी। स्टेट मीडिया के मुताबिक, हादसा तिब्बत के दक्षिण-पश्चिमी इलाके न्यिंगची शहर में डोक्सोंग ला सुरंग के पास हुआ था।
2. नवंबर 2022: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा माछिल इलाके में 5 जवान हिमस्खलन की चपेट में आ गए। इनमें से 3 शहीद हो गए थे। 56 राष्ट्रीय रायफल्स के ये जवान रुटीन गश्त कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और 2 जवानों को बचा लिया गया।
3. फरवरी 2022: अरुणाचल प्रदेश में एवलांच के बाद लापता हुए सेना के 7 जवानों के शव बरामद हुए। सेना के मुताबिक, वे पिछले दो दिन से बर्फ में फंसे थे। भारतीय सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि कामेंग सेक्टर के हाई एल्टिट्यूड वाले क्षेत्र में एवलांच में फंसे सेना के सातों जवानों की मौत हो गई। सभी जवानों के शव एवलांच वाली जगह से बरामद किए गए।
एवलांच की भविष्यवाणी संभव नहीं
अब तक वैज्ञानिक ये भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं हैं कि हिमस्खलन कब और कहां होगा। वे बस बर्फ के ढेर, तापमान और हवा की कंडीशन से हिमस्खलन के खतरे का अनुमान लगा सकते हैं। बर्फ में स्कीइंग वाले कुछ इलाको में एवलांच कंट्रोल टीमें तैनात होती हैं। कुछ स्कीइंग वाले इलाकों के गश्ती दल हिमस्खलन रोकने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल करते हैं। वे किसी भी खतरनाक ढलानों को तोप से उड़ा देते हैं, ताकि किसी ढीले या नए बर्फ के ढेर को हिमस्खलन बनने से रोका जा सके। कनाडा और स्विट्जरलैंड के ऊंचे पहाड़ों पर हिमस्खलन कंट्रोल के लिए स्पेशल मिलिट्री तैनात होती है। स्विट्जरलैंड में कई पहाड़ी गांवों में घरों को बर्फ के ढेर से बचाने के लिए मजबूत ढांचे लगाए जाते हैं।
पहले जानते हैं हिमस्खलन क्या होता है?
बर्फ या पत्थर के पहाड़ की ढलान से तेजी से नीचे गिरने को हिमस्खलन या एवलांच कहते हैं। हिमस्खलन के दौरान, बर्फ, चट्टान, मिट्टी और अन्य चीजें किसी पहाड़ से नीचे की ओर तेजी से फिसलती हैं।हिमस्खलन आमतौर पर तब शुरू होता है जब किसी पहाड़ की ढलान पर मौजूद बर्फ या पत्थर जैसी चीजें उसके आसपास से ढीली हो जाती हैं। इसके बाद ये तेजी से ढलान के नीचे मौजूद और चीजों को इकट्टा कर नीचे की और गिरने लगती हैं। चट्टानों या मिट्टी के स्खलन को भूस्खलन कहते हैं। हिमस्खलन तीन तरह के होते हैं: चट्टानी हिमस्खलन: इनमें बड़े-बड़े चट्टानों के टुकड़े होते हैं। हिमस्खलन: इनमें बर्फ पाउडर या बड़े-बड़े टुकड़ों के रूप में होती है। ये अक्सर ग्लेशियर या हिमनदी के आसपास होते हैं। मलबे के हिमस्खलन: इसमें पत्थर और मिट्टी समेत कई तरह के मटेरियल होते हैं।
हिमस्खलन आखिर शुरू कैसे होता है? मुख्यत: ये दो तरीके से होता है- पहला कई बार पहाड़ों पर पहले से मौजूद बर्फ पर जब हिमपात की वजह से वजन बढ़ता है, तो बर्फ नीचे सरकने लगती है, जिससे हिमस्खलन होता है। दूसरा-गर्मियों में सूरज की रोशनी यानी गर्मी की वजह से बर्फ पिघलने से हिमस्खलन होता है। एक बड़े और पूरी तरह से विकसित हिमस्खलन का वजन 10 लाख टन या 1 अरब किलो तक हो सकता है। पहाड़ों से नीचे गिरने के दौरान इसकी स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे से 320 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा हो सकती है। आमतौर पर हिमस्खलन सर्दियों में होता है और इसके दिसंबर से अप्रैल में होने के आसार ज्यादा रहते हैं।

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