संविधान हत्या दिवस पर भाजपा का देशव्यापी अभियान, कांग्रेस पर साधा निशाना
New Dehli : आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को देशभर में संविधान हत्या दिवस मनाते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। पार्टी की ओर से कई राज्यों में संगोष्ठियां, प्रदर्शनी और जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें आपातकाल के दौर और उसके प्रभावों को याद किया जा रहा है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पटना में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। भाजपा कार्यकर्ता और नेता विभिन्न स्थानों पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को भी याद कर रहे हैं।
नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की ऐसी तारीख है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके अनुसार उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गंभीर प्रहार हुआ था तथा संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यह दिन केवल इतिहास की एक घटना को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का भी दिन है। उन्होंने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने आपातकाल के दौरान कठिन परिस्थितियों में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आपातकाल के अध्याय को लंबे समय तक सार्वजनिक स्मृति से दूर रखने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और उस दौर की घटनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जबकि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण अध्याय है।
नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की महत्ता के प्रति जागरूक करना है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आपातकाल के लिए अब तक देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी गई। उनके अनुसार यदि संविधान और लोकतंत्र के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता होती, तो उस दौर की घटनाओं के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी जानी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद राजनीतिक परिस्थितियों ने नया मोड़ लिया और इसके बाद देश में आपातकाल लागू किया गया। भाजपा का दावा है कि उस समय लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा था।
केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इस दिन उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद किया जाता है जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।