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बून्दी : संस्कृत भाषा हमारी आत्मा, संस्कार तथा संस्कृति हैं - प्रो. पूर्णचंद्र उपाध्याय

बून्दी : संस्कृत भाषा हमारी आत्मा, संस्कार तथा संस्कृति हैं - प्रो. पूर्णचंद्र उपाध्याय

  • कन्या महाविद्यालय में संस्कृत भाषा के सिंहावलोकन विषय पर हुआ व्याख्यान

बून्दी। संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय बून्दी के संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “संस्कृत भाषा की गौरवशाली परंपरा का सिंहावलोकन“ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन प्राचार्य डॉ. संदीप यादव की अध्यक्षता में किया गया, जिसका शुभारंभ मां सरस्वती के माल्यार्पण, दीप-प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ हेमराज सैनी ने विषय प्रवर्तन करते हुए संस्कृत भाषा की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए वर्तमान परिदृश्य में इसकी महत्ता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सारस्वत वक्ता प्रोफेसर पूर्णचंद्र उपाध्याय, आचार्य, राजकीय महाविद्यालय बूंदी ने संस्कृत भाषा के प्रारंभिक स्त्रोत वेद- वेदांग, रामायण एवं महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आधुनिक परिप्रेक्ष्य में संस्कृत की महता प्रकट की। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल एक भाषा के रूप में ही अंगिकार नही करना चाहिए, यह हमारी आत्मा एवं संस्कार तथा संस्कृति है। इसे वर्तमान सरकार को राष्ट्रभाषा तथा मातृभाषा के रूप में स्वीकार करना होगा। अपने व्याख्यान में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में संस्कृत की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए संस्कृत व्याकरण को विज्ञान एवं तकनीकी की एकमात्र आधारभूत भाषा स्वीकार किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर संदीप यादव ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कृत भाषा को पुनः अपनाने तथा राजकार्यों में इसकी भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ हेमराज सैनी ने किया और डॉ मनिलता पचानौत ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ बीरम देव, डॉ विनोद कुमार मीणा, रवि चौपदार,डॉ चंपा अग्रवाल,रवि चौपदार,भोला, अरुणा अग्रवाल,रवि वैष्णव एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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