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China का दुस्साहस, अरुणाचल पर अमेरिका और भारत दोनों से लिया पंगा

China का दुस्साहस, अरुणाचल पर अमेरिका और भारत दोनों से लिया पंगा


जो सुधर जाए वो चीन कहां। पड़ोसी मुल्क के लिए अगर ये लाइन कही जाए तो गलत नहीं होगा। जिनपिंग सरकार को न डर है और न ही शर्म है। भारत से बार-बार लताड़ खाने के बाद भी ड्रैगन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। खासकर भारत के राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की उट-पटांग हरकतें खत्म नहीं होती। ताजा मामला ये है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 30 जगहों के नाम बदल दिए हैं। चीन की तरफ से बकायदा इन नामों की लिस्ट जारी की गई है। जिसे चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया है। ये पहली बार नहीं है जब अरुणाचल पर चीन की तरफ से दावा दिखाते हुए यहां के भौगोलिक क्षेत्र के नाम से छेड़छाड़ की गई है। अरुणाचल को लेकर चीन की ये चौथी लिस्ट है। इस बेसिरपैर की खबर को चीन के सरकारी भोंपू ग्लोबल टाइम्स में प्रमुखता से छापा गया है। ग्लोबल टाइम्स ने बताया है जंगनान में भौगोलिक नामों की चौथी सूची जारी की गई है। ये सूची चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने जारी की है। नए नामों की सूची 1 मई से प्रभावित होगी।

अब चीन के इस दुस्साहस पर क्या कहा जाए। जिस सूबे से उसका कोई लेना-देना ही नहीं वहां के नाम बदलने का भला क्या मतलब हो सकता है। चीन द्वारा नाम बदलने की कवायत को भारत खारिज करता रहा है। चीन भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थानों का नाम बदलने के अपने मूर्खतापूर्ण प्रयासों पर कायम है। हम ऐसे प्रयासों को दृढ़ता से अस्वीकार करते हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, मनगढ़ंत नाम देने से यह वास्तविकता नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, है और हमेशा रहेगा।

मगर चीन हर दूसरे तीसरे दिन ऐसी कोई हरकत कहता रहता है। जिसकी वजह से उसे भारत से ही नहीं बल्कि दूसरे देशों से भी बेइज्जती झेलनी पड़ती है। अरुणाचल के नामों से छेड़छाड़ की उसकी हालिया हरकत पर अमेरिका ने भी खरी खोटी सुनाई गई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में सीधे सीधे कहा गया कि अमेरिका अरुणाचल प्रदेश को भारतीय क्षेत्र के रूप में मान्यता देता है। हम वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सैन्य या असैन्य घुसपैठ या अतिक्रमण के जरिए क्षेत्रिय दावा करने के किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करते हैं। भारत के हक में दिए अमेरिका के इस बयान से चीन और चिढ़ गया। चीन के विदेश और रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी बयान पर ऐतराज जताया। इस विवाद को दोनों देशों के बीच का मामला बताते हुए अमेरिका को इससे दूर रहने की हिदायत देने लगा।

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