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स्पर्श कुष्ठ जागरूकता रथ को सीएमएचओ ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

स्पर्श कुष्ठ जागरूकता रथ को सीएमएचओ ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

कुष्ठ की जांच व उपचार चिकित्सा केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध : सीएमएचओ डॉ. खान

भीलवाडा। कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में ‘‘कलंक मिटाएं-गरिमा अपनाएं’’  थीम के आधार पर 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान का संचालन किया जा रहा है। मंगलवार को जन मानस में कुष्ठ रोग के प्रति जनचेतना जागृत करने के लिए जागरूकता रथ को सीएमएचओ परिसर से रवाना किया गया। जागरूकता रथ को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुस्ताक खान ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता रथ शहर के प्रमुख मार्गो से होकर आमजन को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता करेंगा। इस दौरान जिला आरसीएच अधिकारी डॉ0 संजीव शर्मा, जिला लेखा अधिकारी केदारमल हेडा, एपिडिमियोलॉजिस्ट डॉ0 सुरेश चौधरी, चन्द्रदेव आर्य सहित कार्यालय के अन्य अनुभाग अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुस्ताक खान ने बताया कि कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता के लिए जिले में 30 जनवरी मंगलवार से जिले में ‘स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है जिसमें जिले की 255 ग्राम सभाओं तक कुष्ठ रोग के बारे में फैली भ्रांतियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अनैकों गतिविधियों का संचालन कर आमजन को कुष्ठ रोग के लक्षण, पहचान और उपचार के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान ग्राम सभाओं में सरपंच द्वारा ग्राम सभा के सदस्यों से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव दूर करने के लिए सार्थक प्रयास करने के लिए अपील की गयी। उन्होंने बताया कि कुष्ठ होने पर बहु-औषधीय उपचार (एमडीटी) लेने, बरती जाने वाले सांवधानियों, जल्द जांच और समय से ईलाज के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से फिल्ड में जाकर प्रेरित किया जा रहा है। कुष्ठ रोग आसानी से ठीक होने वाली बीमारी है। इस रोग का जांच व उपचार सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध है। किसी व्यक्ति के शरीर के रंग से हल्का, सुन्न दाग-धब्बा हो, या चमडी पर तैलिया-तामियां चमक हो, हथेली व तलवों में झुनझुनाहट हो, तो उसे कुष्ठ रोग हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को तुरन्त स्वास्थ्य केन्द्र पर जाकर चिकित्सक को दिखाना चाहिए। उपचार में विलम्ब होने पर शरीर में विकृति की संभावना रहती है। इसके लिए प्रारम्भिक अवस्था में रोग की पहचान एवं पूर्ण उपचार से रोगी ठीक हो जाता है एवं विकलांगता से बचा जा सकता है।

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