Dark Mode
राहुल के गुप्त विदेशी दौरे की कीमत चुकाती कांग्रेस

राहुल के गुप्त विदेशी दौरे की कीमत चुकाती कांग्रेस

-संजय सक्सेना
लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गांधी 20 दिनों की गोपनीय यात्रा के बाद भारत वापस आ गये हैं। इस यात्रा के खिलाफ बीजेपी ने राहुल गांधी से कई सवाल पूछे हैं। भाजपा मीडिया सेल ने सवाल किया है कि राहुल गांधी बतायें कि वह 20 दिनों तक कहां रहे,किस किस से मिले और उनकी यात्रा का खर्चा किसने उठाया। वैसे यह पहली बार नहीं हुआ है कि जब राहुल गांधी की विदेष यात्रा को लेकर बघेड़ा खड़ा हुआ है। राहुल अक्सर बिना बतायें विदेष दौरे पर चले जाते हैं। इस दौरान वह अपनी सुरक्षा की भी चिंता नहीं करते हैं। कई बार तो वह अपने सुरक्षा कर्मियों तक को चकमा देकर निकल जाते हैं। राहुल गांधी के लम्बे समय तक विदेष चले जाने के कारण कांग्रेस को संगठनात्मक फैसले लेने में काफी परेषानियों का सामना करना पड़ता है। पंजाब कांग्रेस का विवाद इसका ताजा उदाहरण है,जो राहुल गांधी के विदेष दौर के चलते सुलझ नहीं पाया है।
राहुल गांधी को विदेष से लौटने के साथ ही, उन्हें भाजपा के तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी की विदेश यात्राएं विवादों में घिरी हों; अक्सर उनकी गायब होने की शैली और उससे उपजे राजनीतिक संकट कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी पहेली और चुनौती बनते रहे हैं। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा का तर्क है कि एक प्रमुख विपक्षी नेता के रूप में राहुल गांधी की गतिविधियों पर देश के लोगों का अधिकार है। भाजपा द्वारा उठाया जा रहा है कि राहुल गांधी इन 20 दिनों तक वास्तव में कहाँ थे? इस दौरान उनकी मुलाकात किन विदेशी हस्तियों, संगठनों या संदिग्ध व्यक्तियों से हुई? इस लंबी यात्रा का वित्तीय स्रोत क्या था और इसका खर्च किसने उठाया? सवाल यह भी पूछा गया है कि क्या राहुल गांधी का अपनी सुरक्षा टीम को चकमा देकर चले जाना, उनकी सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति लापरवाही को नहीं दर्शाता है। राहुल या उनकी पार्टी इन सवालोें का जबाव देगी,इसकी उम्मीद नहीं है। दरअसल,राहुल का अचानक विदेश यात्राओं पर जाना उनकी कार्यशैली का एक हिस्सा रहा है। अतीत में भी ऐसी कई यात्राएं विवादों का केंद्र रही हैं। अबकी यात्रा की तरह ही 2015 में बजट सत्र के ठीक पहले राहुल गांधी की कई हफ्तों की गुमशुदगी ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया था। उस समय पार्टी रणनीतिक रूप से कमजोर दिखाई दी थी। इसके अलावा भी कई बार राहुल गांधी व्यक्तिगत कारणों से यूरोप की यात्राओं पर जाते रहे हैं, जिनकी जानकारी कांग्रेस पार्टी भी आधिकारिक रूप से साझा करने से बचती है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म रहता है।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी अक्सर अपनी एसपीजी सुरक्षा या वर्तमान सुरक्षा को सूचित किए बिना निजी यात्राओं पर निकल जाते हैं, जो उनके पद की गरिमा और सुरक्षा मानकों के लिहाज से जोखिम भरा है। वहीं राहुल गांधी का लंबे समय तक पार्टी से दूर रहना कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे के लिए कई समस्याओं को जन्म देता है। खासकर पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में ठहराव आ जाता है। कांग्रेस की कार्यप्रणाली राहुल गांधी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनके न होने से पार्टी में बड़े फैसले अटक जाते हैं। पंजाब कांग्रेस का हालिया अंतर्कलह इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जब पार्टी को संकट प्रबंधन की जरूरत थी, उस वक्त नेतृत्व की अनुपलब्धता ने स्थिति को और बिगड़ने दिया।

इसी तरह से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरता है जब चुनाव के ठीक पहले या महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शीर्ष नेता गायब हो जाता है, तो नीचे के स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और उनमें नेतृत्व के प्रति असुरक्षा की भावना पैदा होती है। भाजपा राहुल गांधी के इस व्यवहार को पार्ट-टाइम पॉलिटिक्स के रूप में प्रचारित करती है। इससे कांग्रेस को यह समझाने में मुश्किल होती है कि वह देश की समस्याओं को लेकर कितनी गंभीर है।
राहुल के विदेष दौरे के खिलाफ बीजेपी हमलावार रहती है तो कांग्रेस इन आरोपों को राहुल गांधी के निजी जीवन में दखल बताती है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी को अपनी निजता का अधिकार है और वह एक स्वतंत्र नागरिक हैं। बीजेपी घटिया राजनीति कर रही है और राहुल की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर ऐसे मुद्दे उठा रही है जिनका जनता से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस यह भी दावा करती है कि पार्टी का काम सुचारू रूप से चल रहा है और उनके नेता डिजिटल माध्यमों से लगातार संपर्क में रहते हैं।
कुल मिलाकर राहुल गांधी के विदेश दौरे न केवल एक व्यक्तिगत यात्रा के रूप में देखे जाते हैं, बल्कि वे कांग्रेस के लिए एक चुनावी जोखिम भी बन गए हैं। एक तरफ भाजपा राहुल गांधी की इस यात्रा को उनके जिम्मेदारी से भागने के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए यह एक ऐसा संकट है जिसे सुलझाए बिना वे भाजपा के आक्रामक चुनाव अभियान का सामना करने में खुद को असहज महसूस करते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपनी इस गोपनीयता को आगे कैसे संभालते हैं, क्योंकि राजनीति में नेता की हर समय की मौजूदगी ही सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!