कांग्रेस: घर को आग लगी घर के चिराग़ से
कांग्रेस में इस समय भगदड़ की स्थिति है। पार्टी नेता लगातार पार्टी छोड़ते जा रहे है। इसका जिम्मेदार
मोदी को बता रहे है। जबकि पार्टी छोड़ने वाले नेता राहुल गाँधी की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे है। जब से
मोदी ने 400 पार का नारा दिया है तब से कांग्रेस के खेमे में घबराहट फेल रही है। कांग्रेस नीत इंडिया
गठबंधन पहले ही बिखराव के कगार पर पहुँच गया है। जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे है
वैसे वैसे कांग्रेस में एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़कर पार्टी के चुनावी भविष्य को पलीता लगा रहे है। साथ
ही कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही है। इंडिया गठबंधन के कई घटक एनडीए की
तरफ जा रहे है। वहीं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी धीरे धीरे अपने 400 पार लक्ष्य की और बढ़ रहे है। विभिन्न
प्रदेशों से मिली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री , सांसद, विधायकों सहित जिला
और ग्राम स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा और एनडीए की दूसरी पार्टियों में शामिल हो रहे है। ताज़ा
समाचार मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुल नाथ के कांग्रेस छोड़ भाजपा
में शामिल होने की अटकलों की मिल रही है। एक जानकारी के अनुसार अब तक 12 पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस
छोड़ चुके है। कमलनाथ ऐसे 13 पूर्व मुख्यमंत्री है जो कांग्रेस छोड़ रहे है। कमलनाथ के साथ लगभग एक
दर्ज़न विधायकों के भी कांग्रेस को अलविदा करने की चर्चा गर्म है। वहीं राजस्थान से कांग्रेस कार्यसमिति के
सदस्य और पूर्व मंत्री महेंद्र जीत सिंह मालविय के कांग्रेस छोड़ भाजपा में मिलने की खबरे भी परवान पर है।
यह खबर बेहद चौंकाने वाली है। मालवीय नाम नेता प्रतिपक्ष के तौर पर चला था, अब वही नेता पार्टी
छोड़कर जा रहा है। एमपी और राजस्थान से अनेक विधायकों के भी भाजपा में शामिल होने की संभावनाएं
व्यक्त की जारही है। इससे पूर्व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कांग्रेस को धत्ता बताकर
भाजपा ज्वाइन कर ली। यूपी कर्णाटक आदि राज्यों से भी कांग्रेस के नेताओं के दलबदल की सूचनाएं मिल
रही है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने महाराष्ट्र में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से कहा कि बड़ी मुसीबत है, क्या कहें,
समझ में नहीं आता। पार्टी ने जिनको सबकुछ दिया, वो भी ऐन मौके पर धोखा दे रहे हैं, पार्टी छोड़ रहे हैं।
इस पर अशोक चव्हाण ने बता दिया कि उन्होंने कांग्रेस क्यों छोड़ी। अशोक चव्हाण ने कहा कि वो कभी पार्टी
की कृपा से राजनीति में आगे नहीं बढ़े, जनता ने उन्हें चुनकर भेजा।
एक तरफ पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गांधी भारत जोड़ों न्याय यात्रा निकाल रहे है, दूसरी तरफ पार्टी में
भगदड़ मची हुई है। महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हाल ही अजित पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी
में शामिल हो गए। सिद्दीकी ने मुंबई में डिप्टी सीएम अजित पवार और NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल
पटेल सहित दूसरे नेताओं की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। इससे महाराष्ट्र में कांग्रेस को बड़ा धक्का लगा
है। इससे पूर्व आचार्य प्रमोद कृष्णम को भाजपा और मोदी का समर्थन करने से कांग्रेस से निकाल दिया
गया। वे भी देर सबेर भाजपा में शामिल हो जायेंगे। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी
कांग्रेस से किनारा कर चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में कैप्टेन अमरिंदर सिंह, गुलाम नबी आज़ाद
ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, सुष्मिता देव, प्रियंका चतुर्वेदी, जितिन प्रसाद, अशोक तंवर,
आरपीएन सिंह, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, जैसे नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इसके अलावा अशोक चौधरी,
हिमन्त बिश्व शर्मा, सुनील जाखड़, अश्वनी कुमार, जैसे बड़े नेता भी पार्टी को अलविदा कर चुके हैं। कांग्रेस
में मची इस भगदड़ को सोनिया गांधी राहुल गांधी और अब मल्लिकार्जुन खरगे रोकने में असक्षम साबित
हुए हैं। कांग्रेस के लड़खड़ाने के साथ इंडिया गठबंधन भी लगभग बिखरने की स्थिति में आ चुका है। चुनाव
से पहले ही मोदी को सत्ताच्युत करने का सपना देखने वाला यह गठबंधन टूट गया। ममता बनर्जी, अरविंद
केजरीवाल कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग में नहीं हैं। जयंत चौधरी बीजेपी के साथ जा चुके हैं। नीतीश कुमार
एक बार फिर पलटी मार भाजपा से गठजोड़ कर चुके हैं। शिवसेना और एनसीपी टूट चुकी है। दोनों का
नेतृत्व जिनके पास है, वो कांग्रेस के खिलाफ हैं। देश में आगामी लोकसभा चुनाव की घोषणा शीघ्र होने जा
रही है। चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी अपनी रणनीति बनाकर तैयारियां शुरू करदी है। एक
मोर्चा या गठबंधन सत्तारूढ़ भाजपा नीत एनडीए का है तो दूसरा कांग्रेस की अगुवाई वाला इंडिया गठबंधन
का है। देश के अधिकांश राज्यों में एनडीए और इंडिया गठबंधनों के बीच सीधे मुकाबले के आसार है। मोदी
के 400 पार के नारे से कांग्रेस खेमे में भारी घबराहट देखी जा रही है।
- बाल मुकुन्द ओझा