भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण ने देश को नोचा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने तीन बुराइयों पर जमकर हमला बोलते हुए जनता से इन्हें समाप्त करने के किए
सहयोग माँगा। प्रधान मंत्री लाल किले से देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा भ्रष्टाचार ने हमारे देश
को दीमक की तरह नोंच लिया है। लेकिन ये मोदी के जीवन का कमिटमेंट है कि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ
लड़ाई लड़ता रहूंगा। दूसरा, परिवारवाद ने हमारे देश को नोंच लिया है। परिवारवाद ने जिस तरह से देश को
जकड़ रखा है, इसने लोगों का हक छीना है। तीसरी बुराई तुष्टिकरण की है। तुष्टिकरण ने देश की मूलभूत
चिंतन को, हमारे राष्ट्रीय चरित्र को दाग लगा दिए हैं. तहस-नहस कर दिया है. इसलिए हमें इन बुराइयों-
भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण के साथ पूरे सामर्थ्य के साथ लड़ना है। इन तीन बुराइयों से मुक्ति
पाना है।
आज़ादी के बाद से ही देश की सियासत में परिवारवाद का डंका बजता रहा है। इनमें सबसे बड़ा सियासी
परिवार नेहरू - गांधी का है जिसकी पांचवीं छठी पीढ़ी राजनीति में सक्रीय है। कहने का मतलब है मोतीलाल
नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सियासी समर में सक्रीय है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों
परिवारवादियों से खासे खफा है। प्रधानमंत्री परिवारवाद को लेकर विरोधियों पर जमकर हमला बोल रहे है।
मोदी कहते है परिवारवाद की वजह से ही देश के युवाओं को, देश की प्रतिभाओं को राजनीति में आने का
अवसर भी नहीं मिलता है। परिवारवाद उनके हर सपनों को कुचलता है, उनके लिए हर दरवाजा बंद करता
है। इसलिए, आज 21वीं सदी के भारत के लिए परिवारवाद से मुक्ति, परिवारवादी पार्टियों से मुक्ति एक
संकल्प भी है।
भारत में भ्रष्टाचार ने लगता है संस्थागत रूप धारण कर लिया है। देश और विदेश की अनेक जानी मानी
संस्थाओं ने समय समय पर जारी अपनी रिपोर्टों में यह जाहिर किया है की लाख प्रयासों के बाद भी भारत में
भ्रष्टाचार कम होने के बजाय बढ़ा है। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलेआम यह कहा है की वे न तो
खाएंगे और न खाने देंगे। मोदी अपनी बात पर कायम रहे मगर भ्रष्टाचार पर काबू नहीं पाया जा सका है।
हमारे देश में भ्रष्टाचार इस हद तक फैल चुका है कि इसने समाज की बुनियाद को ही बुरी तरह हिला कर रख
दिया है। जब तक मुट्ठी गर्म न की जाए तब तक कोई काम ही नहीं होता। भ्रष्टाचार एक संचारी बीमारी की
भांति इतनी तेजी से फैल रहा है कि लोगों को अपना भविष्य अंधकार से भरा नजर आने लगा है और कहीं
कोई भ्रष्टाचार मुक्त समाज की उम्मीद नजर नहीं आरही है। मंत्री से लेकर संतरी और नेताओं तक पर
भ्रस्टाचार के दलदल में फंसे है। हालात इतने बदतर हैं कि निजी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। सिविल
सोसाइटी और मीडिया के दवाब में सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम तो दे रही
हैं मगर उनकी गति बेहद धीमी है ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा ने तय किया है कि वह तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति के
बजाए संतुष्टिकरण के रास्ते पर चलेगी। यह मेहनत वाला रास्ता होता है, पसीना बहाना पड़ता है। भाजपा
ने तय किया हमें तुष्टिकरण या वोट बैंक के रास्ते पर नहीं चलना है। हम मानते हैं कि देश का भला करने
का रास्ता तुष्टिकरण नहीं है।