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 देश की सबसे बड़ी साहित्य वार्षिकी का बीकानेर में लोकार्पण

 देश की सबसे बड़ी साहित्य वार्षिकी का बीकानेर में लोकार्पण


 अर्जुनदेव चारण, ममता कालिया व मधु आचार्य ने किया



बीकानेर। देश की सबसे बड़ी साहित्य वार्षिकी कथारंग का लोकार्पण रविवार को धरणीधर रंगमंच पर भव्य समारोह में हुआ। हरीश बी. शर्मा के संपादन में इस साहित्य वार्षिकी का प्रकाशन गायत्री प्रकाशन ने किया है। पारायण फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह की मुख्य अतिथि ख्यातनाम साहित्यकार ममता कालिया थीं। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-नाटकाकार डॉ.अर्जुनदेव चारण व स्वागताध्यक्ष मधु आचार्य 'आशावादी' थे।। मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया थीं।
मुख्य अतिथि ममता कालिया ने इस अवसर पर कहा कि देश में जब साहित्य वार्षिकियों का प्रकाशन बंद ही हो चुका है, ऐसे समय में बीकानेर से 496 पेज की साहित्य वार्षिकी का प्रकाशन होना इस बात का परिचायक है कि इच्छाशक्ति के चलते कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने बीकानेर से अपने संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि यहां के जनकवि हरीश भादाणी से उनके पारिवारिक संबंध थे। संयोग है कि बीकानेर आना भी हरीश की वजह से हुआ है।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ.अर्जुनदेव चारण ने इस अवसर पर कहा कि यह ऐसा समय है जब शब्द की सत्ता को खत्म करने का प्रयास हो रहा है, ऐसे समय में शब्द की सत्ता की स्थापना का प्रयास है कथारंग। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास दस्तावेजी होते हैं, जिनका महत्व दशकों तक रहता है। स्वागताध्यक्ष मधु आचार्य 'आशावादी' ने कहा कि साहित्य जैसे विषय पर इतना बड़ा काम करने का संकल्प सिर्फ बीकानेर में ही संभव है। हमारा उद्देश्य जन तक सृजन है, इसके लिए हमें इस तरह के प्रयास करते हुए आम जन तक साहित्य को पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। संपादक हरीश बी. शर्मा  ने कहा कि यह कार्य तो हो गया, अब नये अंक की तैयारी में लगना है। हमारी अगली वार्षिकी का केंद्रीय विषय लोक भाषा, साहित्य व संस्कृति होगा। उन्होंने कहा कि यह किसी भी अकेले के वश की बात नहीं बल्कि टीम वक है। लोकार्पित कृति पर उपन्यासकार व समालोचक डॉ.रेणुका व्यास 'नीलम' ने पत्रवाचन किया। संचालन कवयित्री-कहानीकार ऋतु शर्मा ने किया। स्वागत उद्बोधन वरिष्ठ  पत्रकार धीरेंद्र आचार्य ने किया। आभार वास्तुविद् आर.के.सुतार ने माना। इस अवसर पर शोध उपाधि मिलने पर डॉ.सीमा भाटी का अभिनंदन किया गया।  अभिनंदन पत्र का वाचन वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने किया। 

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