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डॉक्टर: जनरल फिजिशियन एमडी सर्जन या विशेषज्ञ

डॉक्टर: जनरल फिजिशियन एमडी सर्जन या विशेषज्ञ

कुछ डॉक्टर के दिल में सेवा भाव और इंसानियत है परंतु अनेक डॉक्टर पैसे के लालच में अपने सब एथिक्स भूल गए। अमेरिका में एक सर्वे अनुसार करीब 15000 व्यक्ति प्रति माह एमडी डॉक्टर की गलत एडवाइस से मरते हैं। हमारे यहां कुछ ही डॉक्टर हैं जो बीमारी की जड़ पर जाते हैं बाकी अधिकतर डॉक्टर आपकी जांचे करवाते हैं और सिर्फ उसी आधार पर आपको इलाज देते हैं चाहे रिपोर्ट सही हो या गलत। और वे अधिकतर उन्ही दवाई या इंजेक्शन को लिखते है जो कंपनियां उनको कमीशन देती है। हम डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं, हमेशा सभी यही कहते हैं जो डॉक्टर कह रहे वह सही है। लेकिन कई डॉक्टर हमारी इसी अंधविश्वास को देखते हुए अपने आप को प्रिंस मानने लगे हैं वह जरा भी तकलीफ नहीं उठाते हैं कि कौन सी ड्रग दर्द दवाई हम पेशेंट को दे रहे हैं उससे पैशन पर क्या इफेक्ट होंगे क्या साइड इफेक्ट होंगे। वे तो बस जो दवाई कंपनी उनको आईना दिखाती है उसी आधार पर दवाई प्रिस्क्राइब करते हैं। कोरोना के दौर में हमने यह देखा बार-बार जिस मेडिसिन से इलाज किया गया उसे बाद में नकारा गया अब उन दी गई मेडिसिन के साइड इफेक्ट जनता में आना शुरू हो गए कई मौतें भी हो गई। मानते हैं डॉक्टर काफी पैसा देकर पढ़ाई करते हैं पैसा कमाना सभी का हक है पर जो पैसा आपके पास आता है उसके प्रति मान रखना भी उनका फर्ज है, यदी यह लक्षण है कि सिर्फ पैसा चाहिए आपको मरीज आपकी फीस देता है तो उसको उसका पूरा रिटर्न देना चाहिए। भारत के डॉक्टर भाग्यशाली है कि यहां उन पर सीधे-सीधे कोई भी कार्रवाई नहीं होती है ना ही f.i.r. होती है और ना ही उपभोक्ता फोरम में कार्रवाई होती है क्योंकि मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट पर वे सब बच जाते हैं। कई डॉक्टर के पीछे लोग क्यों भागते हैं जबकी 1 दिन में सौ पचास पेशेन्ट को वे देखते हैं, अब अंदाज लगा लो कि वह पेशेंट को क्या समय देकर उसकी बीमारी की जानकारी लेते होंगे। पब्लिक को भी बड़ा शौक है की उन्हे ब्रांडेड डॉक्टर चाहिए। इसलिए अनेक डॉक्टर ने अपना ट्रेंड बना लिया ब्रांड नेम बनाने के दो रास्ते हैं एक तो अच्छी खासी मोटी फीस ले, दूसरा उनके वहां घंटे दो 2 घंटे लाइन में मरीज को बिठाए रखना। सबसे खास बात यह है कि पब्लिक भी इन चोचलो से खुश भी है। आजकल एक नया ट्रेन चालू हो गया सर्जन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट वहां आने वाले अधिक से अधिक पेशेंट की सर्जरी कराना, जिससे डॉक्टर और हॉस्पिटल का बिल बडे। एक बीमारी के बाद मानो आपको किडनी की परेशानी है तो पेशेंट को बताते हैं कि भाई तुम आती हो तो हाथों-हाथ हार्ट वाले को भी दिखा दो हॉट वाले को हमेशा बैलून लगाने की या बाईपास की सलाह दी जाती है और उसे इस तरह से सलाह देते हैं कि वह घबराकर हां भर लेता है। सरकार ने अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज खोलना चाहिए और कम फीस पर बच्चे पढ़ सकें ताकि डॉक्टर मरीजों से कम फिस लें और हॉस्पिटल सेवा का कार्य समझे ना कि पैसा कमाने का।

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