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कौशल विकास योजनाओं से हो रहे हैं युवाओं के सपने साकार

कौशल विकास योजनाओं से हो रहे हैं युवाओं के सपने साकार

  • मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना (राजक्विक) में 17 हजार से अधिक यूथ को मिल रही है स्किल ट्रेनिंग

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में हुनरमंद बनकर युवा रोजगार हासिल कर रहे हैं। कई युवा तो खुद का धंधा शुरू कर अन्य युवक-युवतियों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं। ऐसी ही एक योजना मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना (राजक्विक) है, जिसके तहत वर्तमान में 17 हजार से अधिक युवक-युवतियां कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं। पिछले छह महीने में ही साढ़े पांच हजार से अधिक प्रशिक्षुओं ने इस योजना का लाभ लेकर अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।

राजस्थान कौशल और आजीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) की ओर से चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को बाजार की मांग के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस योजना के तहत विशेष मनोनयन की प्रक्रिया और रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय मॉडल को अपनाकर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार भी सुनिश्चित किया जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मान्यता प्राप्त और संबद्ध प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रदान किए जाने वाले राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) संरेखित पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। इस योजना के तहत शॉर्ट टर्म कोर्स (एसटीटी), रिक्रूट ट्रैन एंड डेप्लॉय (आरटीडी) एवं रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) मॉडल अपनाए जा रहे हैं।

राजस्थान राज्य के स्कूल-कॉलेज छोड़ने वाले और बेरोजगार युवा इस योजना का लाभ ले सकते हैं। प्रशिक्षुओं की उम्र 15 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। महिलाएं और विशेष योग्यजन 45 साल की उम्र तक यह प्रशिक्षण ले सकते हैं। इस योजना में कुल प्रशिक्षित उम्मीदवारों में से कम से कम 70 प्रतिशत को रोजगार दिलवाने का प्रावधान है, जिसका तृतीय पक्ष द्वारा मूल्याकंन एवं प्रमाणीकरण किया जाता है। उसके बाद ही प्रशिक्षण देने वाली संबंधित संस्था को भुगतान किया जाता है।

प्रशिक्षण के साथ छात्रावास की सुविधा
इस योजना के तहत राज्य सरकार युवाओं को प्रशिक्षण के लिए राशि देने के साथ छात्रावास में रहने का भी खर्च देती है। प्रशिक्षण के लिए प्रति प्रशिक्षणार्थी संबंधित संस्था को राशि का भुगतान किया जाता है, जिसमें तीन प्रकार की श्रेणी बनी हुई है। पहली श्रेणी में प्रति प्रशिक्षु प्रति घंटे प्रशिक्षण के 42.40 रुपए, दूसरी श्रेणी में 36.30 रुपए एवं तीसरी श्रेणी में 30.30 रुपए का भुगतान किया जाता है। इस योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षुओं को छात्रावास में रहकर प्रशिक्षण हासिल करने की भी सुविधा दी जाती है। शहरों की विभिन्न श्रेणी अनुसार 175, 200 एवं 250 रुपए प्रति दिन के हिसाब से दिए जाते हैं।

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