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मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते भी कार्तिक पूर्णिमा पर श्रीनाथजी मन्दिर में उमड़ा जनसैलाब

मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते भी कार्तिक पूर्णिमा पर श्रीनाथजी मन्दिर में उमड़ा जनसैलाब

नाथद्वारा। वल्लभ सम प्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा मन्दिर में आज कार्तिक पूर्णिमा के चलते देश भर से हजारों लोगों वैष्णव जन का आवागमन होने से मन्दिर मंडल द्वारा दर्शन व्यवस्था को लेकर खेवां प्रणाली से दर्शन करवाए गए जिसमे वैष्णव को लाल दरवाजा होते हुए मीरा बाई मंदिर के बहार से नंगार खाना होते हुए गोर्वधन पूजा चोक मे से प्रवेश करवाते हुए धोली पटिया, कमल चोक, अनार चोक होते हुए ढोल तिवारी से ठाकर जी के दर्शन करते हुए रतन चोक मे आते हुवे लाडले लाल के दर्शन करते हुए मोती महल परिसर से बाहर निकशी की गई साथ ही आने वाले दर्शनार्थियो वैष्णव जन के द्वारा भेट, सामग्री करवाने पर मिलने वाले प्रशाद की व्यवस्था मोती महल के बाहर, खर्च भंडार के बाहर मंदिर मंडल द्वारा प्रशाद काउंटर बनाए रखे हैं जहा से रसीद का प्रशाद किया जा रहा है, साथ ही इसी श्रृंखला में प्रति दिन राज भोग के समय तिलकायत महाराज श्री की आज्ञा से वर्षों से आने वाले दर्शनार्थियो वैष्णव जन को निशुल्क प्रशाद नगार खाना गेट के बाहर नरेन्द्र पालीवाल, व चंदू माली, घनश्याम टेलर व उनकी टीम द्वारा वितरण किया जाता है, साथ ही मंदिर मंडल प्रशासन द्वारा ठाकुरजी के राग भोग श्रृंगार,, करवाने वाले मनोर्थियो को विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाती है जिसमे समाधान विभाग में मनोरथ, सामग्री लिखवाने वाले वैष्णव जन को दर्शन पास उपलब्ध करवाए जाते है जिसके चलते वे समाधान विभाग के पास बना मार्ग जिसमे से मनोर्थियों, व वीआईपी, वि वीआईपी, को प्रमुख रुप से आरती के दर्शन करवाए जाते है , इस विषेश व्यवस्था के चलते आम आदमी, दर्शनार्थनियो को आरती के दर्शन का लाभ मुमकिन नहीं है, साथ ही श्रीनाथजी मन्दिर में आने वाले दर्शनार्थियो वैष्णव जन को सनातन, संस्कृति, मर्यादा परम्परा अनुसार गरीमामय परीधान पहनकर आने हेतू मंदिर परीशर मे जगह जगह बोर्ड लगाये है। आधुनिक, विकाश की सोच रखते हुए तिलकायत महाराज श्री ची युवराज, कुल दीपक विशाल बावा साहब द्वारा समय की मांग को देखते देखते अत्याधुनिक साधन सुविधाओं से युक्त ठाकर जी के राग भोग श्रृंगार की सेवा स्थल जो सदियों पुरानी व्यवस्था उपलब्ध थी जिसको पुनः नवीनीकरण करवाकर उसमे आधुनिक साधन सुविधा व्यव्स्था उपल्ब्ध करवाई गई है जिसमें ठाकुरजी के बाल भोग, सकड़ी रसोई, पातल घर, खांडघर, फुलघर, दूधघर, पानघर, ध्वजाजी अगासी, समाधान, विभाग, परसादी भण्डार, अन्नकूट रसोई, सागघर,खासाभण्डार
गौ शाला में अमूल चूक परिवर्तन समय की मांग को देखते हुए करवाए गए विकास कार्य, को लेकर समस्त सेवा वाले ब्रजवासियों ने मुक्त कंठ से प्रसाशा करते हुए आभार व्यक्त किया, सेवा वाले ब्रजवासियों ने बताया कि समय की मांग है कि विकास तो होना ही चाहिए और विकास हो रहा है, उसके लिए हार्दिक आभार परंतु वर्तमान समय में दर्शन व्यवस्था में सुधार, बदलाव की आवश्यकता है, कोरोणा काल में जो दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी वो उस समय की भीड़ की परस्थितियों के उपयुक्त थी परंतु वर्तमान समय में रैलिंग दर्शनार्थियो वैष्णव जन के लिए भारी पड़ रही है, लोगो को घंटो लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है जिसके चलते कई बार बुजुर्ग महिलाओं समेत बच्चों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, कई वैष्णव जन ने बताया कि दर्शन व्यवस्था पुरानी परंपरा अनुसार ही होनी चाहिए जिसके चलते सहज दर्शन लाभ लिया जा सके, हालात ऐसे बनते हैं कि ग्यारा बजे दर्शन खुलते है लाइन में लगते बारह बजे एक बजे नम्बर आता है, भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है साथ ही ठाकुरजी को भी भारी परिश्रम उठाना पड़ रहा है। जिसको लेकर मुंबई निवासी सुमित्रा बेन, हंसा बेन, जितेंद्र भाई, लोकेश भाई, कीर्ति भाई, अशोक कावड़िया, हितेश भाई, मुकुंद राय, गोर्वधन, कन्नू भाई सहित कई लोगो ने आधुनिक विकास के प्रणेता चिरंजीव युवराज विशाल बावा साहब से विनती किया है कि आप द्वारा मंदिर में विकास कार्य करवाए गए को काबिले तारीफ है परंतु दर्शन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। जिसको लेकर आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि दर्शन व्यवस्था में बदलाव करवाया जायगा।

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