पूर्व सैनिक संगठन ने मनाया कारगिल विजय दिवस
कारगिल विजय दिवस शूरवीरों की शौर्य गाथा : मोयल
सोजत । कारगिल विजय दिवस शूरवीरों की शौर्य गाथा है जो देश वासियों के लिए सदैव प्रेरणा शक्ति बनी रहेगी उक्त उद्गार स्थानीय वेद सेन समाज की बगीची में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा आयोजित कारगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पेंशनर समाज के अध्यक्ष लालचंद मोयल ने अपने उद्बोधन में व्यक्त किए उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस देश के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाता है। यह देश के वीर सपूतों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रगट करने का दिन है। कार्यक्रम व संस्था अध्यक्ष सूबेदार पाबूसिंह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस के दिन को याद कर आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह दिन हमारे सैनिकों की बहादुरी, शौर्य और अदम्य साहस की याद दिलाता है। सचिव अशोक सेन ने बताया कि पाकिस्तान भारत से दो युद्ध 1965 और 1971 में लड़ चुका था। मगर वह कश्मीर को अपने कब्जे में नहीं कर पाया। उसने 1999 में फिर से प्रयास किया। कारगिल में उसने अपने सैनिकों को आक्रमण करने के लिए भेजा। इस युद्ध में भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। मुंह की खाने के बाद वह अपने बिल में घुस गया। कारगिल में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के अंतर्गत पाकिस्तान के सैनिकों को मार भगाया। पाकिस्तान पर भारतीय सेना ने सम्मानजनक विजय हासिल की। कार्यक्रम का सरस संचालन पूर्व खेल अधिकारी सत्तुसिंह भाटी ने किया। कवि रामस्वरूप भटनागर व रशीद गौरी ने अपने जोशीले अंदाज में कविताएं सुनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सोहन लाल गहलोत उमेद लाल सोहन नाथ कालू सिंह देवी सिंह रूपा राम देवासी फते सिंह नाथू सिंह भाटी नारायण सिंह गहलोत भुंडाराम हिरसिह चौधरी जोगसिंह आरसी गहलोत आदि फौजियों सहित मदनलाल चौहान, दिनेश सोलंकी, अब्दुल गनी ताजक, अनवर पठान, भामाशाह जवरी लाल बोराणा, फकीर मोहम्मद पठान, हाजी अब्दुल सलीम सिलावट, ईसाक शेख आदि कई गणमान्य जन उपस्थित थे।