राहुल-पप्पू यादव पर एफआईआर से गरमाई सियासत, सपा ने सरकार पर साधा निशाना
लखनऊ। संसद परिसर के बाहर राम मंदिर चंदा चढ़ावा मामले को लेकर किए गए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और सपा सांसद अवधेश प्रसाद पर दर्ज एफआईआर ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बताया है।
सपा विधायक अंकित भारती ने कहा कि सरकार धर्म के मुद्दे को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उनका आरोप है कि जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसके खिलाफ जांच एजेंसियों या कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाला नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात आगे भी रखता रहेगा।
सपा विधायक रामअवतार सैनी ने भी इस कार्रवाई को एकतरफा करार देते हुए निष्पक्ष रवैये की मांग की। उनका कहना था कि केवल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
वहीं, विधायक मुकेश वर्मा ने राम मंदिर से जुड़े कई सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट के गठन, उसके सदस्यों के चयन और उद्घाटन प्रक्रिया को लेकर भी जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचनाओं से घबराकर विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राम मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों की भी जांच की मांग की।
गौरतलब है कि राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ सनातन धर्म के अपमान और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला संसद परिसर के बाहर राम मंदिर चंदा चढ़ावा मुद्दे पर किए गए एक प्रतीकात्मक नाटक से जुड़ा है।
सपा नेताओं का कहना है कि सरकार आलोचना को स्वीकार करने के बजाय कानूनी कार्रवाई का सहारा ले रही है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से इस मामले में अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।