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मुफ्त रेवड़ी करेगी चुनावी वैतरणी पार

मुफ्त रेवड़ी करेगी चुनावी वैतरणी पार

राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों को विश्वास है की उन्होंने चुनाव से पहले घोषणाओं
की जो झड़ी लगाई है उससे प्रभावित होकर मतदाता उनकी सरकार को रिपीट करेगी। विशेषकर
महिलाओं के कल्याण के लिए जो कार्य किये है वे बेमिसाल है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने
महिलाओं को मुफ्त मोबाइल बांट कर महिला मतदाताओं लुभाने का प्रयास किया है ताकि बड़ी
संख्या में आधी आबादी के वोटों से झोली भरी जा सके। गहलोत सरकार ने महिलाओं के लिए
इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना 2023 की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राजस्थान की 1
करोड़ 35 लाख महिलाओं को फेज वाइज में स्मार्टफोन प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ
राजस्थान सरकार की ओर से तीन वर्ष तक फ्री इंटरनेट कनेक्टिविटी भी दिया जा रहा है। अब
तक इस योजना से 2381340 परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के
मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना के जरिये महिलाओं लो साधने का प्रयास किया है। मध्य
प्रदेश सरकार द्वारा 2023 मार्च में लाडली बहना योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना
का लाभ करोड़ो महिलाओ के द्वारा उठाया जा रहा है। लाडली बहना योजना का लाभ गरीब
लड़कियों और महिलाओं को आर्थिक रूप से मदद देने के लिए की गई है। सरकार ने प्रत्येक
लाभार्थी को 1250 रुपये मासिक प्रदान करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने
ऐलान किया है की लाड़ली बहना योजना की राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये कर देंगे।
आश्चर्य तो इस बात का है की दोनों ही प्रदेशों के मुख्यमंत्री दावा कर रहे है की उनके राज्य में
एंटी इंकम्बेंसी का कोई प्रभाव नहीं है। हालाँकि एंटी इंकम्बेंसी है या नहीं यह जनता जनार्दन तय
करती है। मुफ्त रेवड़ी बाँट कर एंटी इंकम्बेंसी को रोका नहीं जा सकता। दोनों ही राज्यों में मुफ्त
रेवड़ी बाँटने का कार्य युद्धस्तर पर किया गया है। यह देखा गया है कुछ सालों से देश की
चुनावी राजनीति में मुफ्त बिजली—पानी मुफ्त राशन आदि आदि अनेक तरह की घोषणाओं का
चलन बढ़ गया है। विशेषकर चुनाव आते ही वोटर्स को लुभाने का सिलसिला शुरू हो जाता है ।
इससे नया शब्द चर्चा में आ गया जिसे रेवड़ी कल्चर नाम दिया गया है। राजस्थान और
मध्यप्रदेश इसके ज्वलंत उदाहरण है। मुफ्त का मिल जाये तो उसका जी भर उपयोग करना। इसे
रेवड़ी कल्चर भी कहते है। ये मुफ्त की नहीं है अपितु जनता के खून पसीनें की कमाई है जो
राजनीतिक दलों और सरकारों द्वारा दी जा रही है ताकि चुनाव की बेतरणी आसानी से पार की
जा सके। हाल फिलहाल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले सरकारें जबरदस्त

पैसे उड़ा रही हैं। अब इसी को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। इस याचिका में
कहा गया है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकारें चुनावों से पहले मुफ्त की रेवड़ियां बांट रही है। इन पर
रोक लगाई जाए। इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने एमपी, राजस्थान और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया
है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज
मिश्रा की पीठ ने जनहित याचिका पर केंद्र, निर्वाचन आयोग तथा भारतीय रिजर्व बैंक को भी नोटिस जारी
किया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया गया है कि दोनों राज्य की सरकारें मतदाताओं को प्रलोभन देने के
लिए करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग कर रही हैं। याचिकाकर्ता की पैरवी करने वाले वकील ने कहा, ‘‘चुनाव
से पहले सरकार द्वारा नकदी बांटने से ज्यादा खराब और कुछ नहीं हो सकता। हर बार यह होता है और
इसका बोझ आखिरकार करदाताओं पर आता है। कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को चार हफ्तों के भीतर
जवाब दाखिल करने को कहा है।
चुनाव आयोग ने कहा था कि चुनाव से पहले या बाद में मुफ्त उपहार देना राजनीतिक दलों का नीतिगत
फैसला है। वह राज्य की नीतियों और पार्टियों की ओर से लिए गए फैसलों को नियंत्रित नहीं कर सकता।
आयोग ने कहा कि इस तरह की नीतियों का क्या नकारात्मक असर होता है? ये आर्थिक रूप से व्यवहारिक
हैं या नहीं? जिसे आप सामान्य भाषा में ‘फ्रीबीज़ यानी मुफ़्त की चीज़ें कह रहे हैं।

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