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राजस्थान में गहराया गैस संकट : एजेंसियों पर लंबी कतारें, कई रेस्टोरेंट बंद

राजस्थान में गहराया गैस संकट : एजेंसियों पर लंबी कतारें, कई रेस्टोरेंट बंद

जयपुर। राजस्थान में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने से हालात गंभीर होते जा रहे हैं। प्रदेश के कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं और कई जगहों पर मेन्यू में कटौती करनी पड़ी है।

अलवर में गैस सिलेंडर की किल्लत तेजी से बढ़ गई है। मालवीय नगर स्थित गैस सर्विस पर शुक्रवार सुबह पांच बजे से ही लोग लाइन में लग गए। एजेंसी खुलने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज ग्राहक पुलिस से भी उलझ गए। एजेंसी पर बोर्ड लगा दिया गया कि 10 मार्च तक बुकिंग कराने वालों को ही सिलेंडर मिल सकेंगे।

गैस की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी पड़ा है। उदयपुर के कई होटलों में गैस सिलेंडर का स्टॉक खत्म होने लगा है।

एक होटल के संचालक राजेश अग्रवाल ने बताया कि स्टाफ को इंडक्शन कुकटॉप पर खाना बनाने की ट्रेनिंग दी गई है और अब चाय, पराठा और नाश्ता इंडक्शन पर बनाकर रूम सर्विस दी जा रही है। वहीं, उदयपुर के एक अन्य होटल एंड रेस्टोरेंट में कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण ब्रेकफास्ट और लंच सेवा अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है।

कोटा के लैंडमार्क सिटी क्षेत्र में एक हॉस्टल के मेस में गैस नहीं मिलने के कारण लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर छात्रों के लिए रोटी-सब्जी बनाई जा रही है।

जयपुर में चांदपोल स्थित संजय सर्किल पर जयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से गैस किल्लत के चलते सांकेतिक विरोध किया गया। लकड़ी से चूल्हा जलाकर खाना बनाया गया।

एलपीजी सिलेंडर की शव यात्रा निकालकर नाराजगी जाहिर की। केंद्र और राजस्थान सरकार का पुतला फूंका।

प्रदर्शन में पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा, विधायक अमीन कागजी और रफीक खान सहित कांग्रेसी नेता कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रदेश के कई इलाकों से घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। गैस की कमी के कारण लोग अधिक कीमत देकर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। तेल कंपनियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतराल तय किया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अवधि 25 दिन रखी गई है।

गैस संकट के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को केरोसिन आवंटित किया है। पूरे देश में 48,240 किलोलीटर केरोसिन का आवंटन किया गया है, जिसमें राजस्थान को 2,928 किलोलीटर यानी लगभग 29 लाख 28 हजार लीटर केरोसिन दिया गया है। अब राज्य सरकार को तय करना है कि इस केरोसिन का वितरण कैसे और किन श्रेणी के लोगों को किया जाएगा। केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए और वितरण की कड़ी निगरानी की जाए ताकि इसका दुरुपयोग या पेट्रोल-डीजल में मिलावट न हो।

राजस्थान में केरोसिन मुक्त राज्य बनाने का अभियान वर्ष 2013 में अलवर जिले के कोटकासिम से शुरू हुआ था। उस समय क्षेत्र के सभी परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन मिलने के बाद इसे पहला केरोसिन फ्री क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश को केरोसिन फ्री घोषित किया गया था।

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