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हेल्पलाइन 181 पर पहुंचे शासन सचिव, परिवादियों से सीधे सुनीं शिकायतें

हेल्पलाइन 181 पर पहुंचे शासन सचिव, परिवादियों से सीधे सुनीं शिकायतें

 

  • हेल्पलाइन 181 पर डॉ. जोगाराम ने परिवादियों से सीधे संवाद किया।

  • खराब सड़क, लंबित भुगतान और पट्टे की नकल सहित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश।

  • विभागीय सूचनाओं और मॉनिटरिंग के लिए एकीकृत व्यवस्था बनाने का सुझाव।

 

जयपुर। आमजन की शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। शासन सचिव एवं आयुक्त पंचायती राज डॉ. जोगाराम ने मंगलवार को हेल्पलाइन केंद्र का निरीक्षण कर पोर्टल पर दर्ज परिवादों और उनके निस्तारण की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने शिकायतकर्ताओं से वीडियो और ऑडियो कॉल के जरिए बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।

निरीक्षण के दौरान सामने आए मामलों में भरतपुर जिले के निहाल सिंह ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य का भुगतान लंबित होने की शिकायत की। भीलवाड़ा के सुरेश ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और सड़क क्षतिग्रस्त होने का मामला उठाया। वहीं, श्रीगंगानगर के रामस्वरूप ने पट्टे की नकल जारी नहीं होने और चित्तौड़गढ़ के गोपाल ने खराब पड़े सरकारी ट्यूबवेल की मरम्मत नहीं होने की समस्या बताई।

डॉ. जोगाराम ने इन शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई करने और नियमानुसार जल्द समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में देरी नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक मामले की प्रगति पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।

उन्होंने केंद्र में संपर्क एआई विश्लेषण की प्रक्रिया को भी समझा। इस तकनीक के जरिए शिकायतों और उनसे जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण किया जा सकता है। डॉ. जोगाराम ने इसे उपयोगी पहल बताते हुए कहा कि इससे शिकायतों की प्रकृति समझने, बार-बार सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करने और व्यवस्थागत सुधार करने में मदद मिल सकती है। इसका उद्देश्य आमजन की संतुष्टि बढ़ाना होना चाहिए।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने पंचायती राज विभाग के कामकाज की निगरानी को और व्यवस्थित बनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय सर्कुलर, बैठकों की जानकारी और उनसे जुड़े विवरण एक ही डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध होने चाहिए, ताकि अधिकारियों को सूचनाएं जुटाने में आसानी हो।

डॉ. जोगाराम के अनुसार, ग्राम विकास अधिकारी से लेकर विभागाध्यक्ष तक हर स्तर पर प्रमुख संकेतकों यानी की-इंडिकेटर्स के आधार पर संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। इससे विभागीय कामकाज की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग संभव होगी।

इस अवसर पर पंचायती राज विभाग और राजस्थान संपर्क केंद्र के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

 

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