राजस्थान में 24 लाख से ज्यादा पांडुलिपियों का सर्वे, 1.61 लाख का डिजिटलीकरण
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राजस्थान में 24.63 लाख पांडुलिपियों का सत्यापित सर्वेक्षण पूरा।
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1.61 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, 19 केंद्रों पर काम जारी।
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डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन के दूसरे चरण में 28 में से 24 क्षेत्रों को केंद्र की सहमति।
जयपुर। राजस्थान में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने और भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन और ज्ञान भारतम् मिशन के तहत हो रही प्रगति की जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत राजस्थान में अब तक 24,63,769 पांडुलिपियों का सत्यापित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इनमें से लगभग 1 लाख 61 हजार पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी हो चुका है। यह काम प्रदेश के 19 केंद्रों पर लगातार जारी है।
इस अभियान में अलग-अलग संस्थानों और पांडुलिपियों के निजी संग्रहकर्ताओं को भी जोड़ा गया है। विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से पांडुलिपियों की पहचान और संरक्षण का काम किया जा रहा है। संस्कृत के साथ अरबी, फारसी, प्राकृत, पाली और अपभ्रंश भाषाओं में उपलब्ध प्राचीन सामग्री को भी इस पहल में शामिल किया गया है।
श्रीनिवास ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन का मकसद केवल पुरानी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। डिजिटलीकरण से इन दुर्लभ दस्तावेजों को लंबे समय तक संरक्षित रखने और भविष्य में उनके अध्ययन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बैठक में प्रशासनिक सुधारों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने बताया कि डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन के पहले चरण में राजस्थान को दिए गए सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में कार्रवाई पूरी कर ली गई है। दूसरे चरण में मिले 28 क्षेत्रों में से 24 पर राज्य की ओर से किए गए कार्यों को केंद्र सरकार की सहमति मिल चुकी है।
बाकी चार क्षेत्रों में से तीन पर राज्य स्तर पर काम चल रहा है, जबकि एक प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इन सुधारों के तहत भवन निर्माण, उद्योगों की स्थापना और व्यावसायिक मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अनावश्यक नियमों और नियामकीय अड़चनों को कम कर निवेश तथा कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इन दोनों पहलों को विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जोड़कर आगे बढ़ा रही है।