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महान समाज सुधारक कमलादेवी चट्टोपाध्याय

महान समाज सुधारक कमलादेवी चट्टोपाध्याय

देश में स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले अनगिनत सेनानियों में कुछ ऐसे भी है जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी
अप्रतिम सेवाओं के लिए आज भी याद किये जाते है। इनमें एक महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता
सेनानी कमलादेवी चट्टोपाध्याय भी है जिन्होंने देश की हस्तकला को नवजीवन प्रदान किया था। आज
उनकी जयंती है। वह सारस्वत ब्राह्मण समुदाय की पहली महिला थीं, जिन्होंने विधवा होने के बाद शादी की
और कानूनी तौर पर तलाक प्राप्त किया। वे स्वतंत्रता संग्राम में गिरफ्तार होने वाली पहली भारतीय महिला
स्वतंत्रता सेनानी थी। कमला देवी ही थी जिन्होंने गांधीजी को आज़ादी के आंदोलन में महिलाओं की
भागीदारी के लिए राजी किया।
भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी और सुधारक कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने हथकरघा और हस्तशल्पि
उद्योग को एक नई दिशा देते हुए महिलाओं की सामाजिक आर्थिक भागीदारी को सुनिश्चित करने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे आजादी से पूर्व विधानसभा चुनाव लड़ने वाली पहली महिला थी। कमलादेवी
का 3 अप्रैल 23 को 120वां जन्मदिवस है। चट्टोपाध्याय को न केवल भारत की आजादी के संग्राम में उनके
अप्रतिम योगदान के लिए याद किया जाता है। बल्कि आजाद भारत में हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम्स और थिएटर की
स्थिति में सुधार में उनके योगदान के चलते भी याद किया जाता है। कमलादेवी ने सहकारिता आंदोलन के
जरिए भारतीय महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी खूब काम किया।
राजधानी दिल्ली में स्थित थिएटर इंस्टीट्यूट नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक अकादमी, सेंट्रल
कॉटेज इंडस्ट्रीज इंपोरियम और क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे मशहूर संस्थानों को बनाने में भी
उनकी अहम भूमिका रही है। उन्हें भारत में म्यूजिक, डांस और ड्रामा की नैशनल अकेडमी, संगीत नाटक
अकादमी से सर्वोच्च सम्मान संगीत नाटक अकेडमी फेलोशिप भी मिली।
कमलादेवी का जन्म कर्नाटक के सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में 3 अप्रैल, 1903 में हुआ था। इनके पिता
मंगलोर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर थे। कमलादेवी जब सिर्फ सात साल की ही थीं, उसी समय उनके पिता का
निधन हो गया था। कमलादेवी की 14 साल की उम्र में ही शादी कर दी गई थी। लेकिन दो साल बाद ही उनके
पति कृष्ण राव की मौत हो गई। बाद में उन्होंने हरेन्द्रनाथ से विवाह रचाया। कमलादेवी पति हरेंद्रनाथ
चट्टोपाध्याय के साथ लंदन चली गई थीं। लेकिन जब 1923 में उन्हें गांधीजी के असहयोग आंदोलन के बारे
में पता चला तो वे भारत आ गईं और आजादी के आंदोलन में कूद गईं। उन्होंने गांधीजी के नमक सत्याग्रह
में भी हिस्सा लिया था। नमक कानून तोड़ने के मामले में बांबे प्रेसीडेंसी में गिरफ्तार होने वाली वे पहली

महिला थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे चार बार जेल गईं और पांच साल तक सलाखों के पीछे रहीं।
इसी बीच हरेंद्रनाथ से उनका तलाक हो गया। आजादी के बाद देश का विभाजन हो गया था और
शरणार्थियों को बसाने के लिए जगह की तलाश थी, उस समय कमलादेवी ने गांधीजी से अनुमति लेकर
टाउनशिप बसाने का जिम्मा लिया। फरीदाबाद को बसाने श्रेय उन्हें है।
कमलादेवी ने फिल्मों में भी हाथ आजमाया था। वे दो साइलेंट फिल्मों में नजर आई थीं। इसमें से एक
कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की पहली साइलेंट फिल्म थी। इसका नाम था ‘मृच्छकटिका (1931)। लंबे समय बाद
वे एक बार फिल्मों में नजर आईं। वे ‘तानसेन फिल्म में के.एल. सहगल और खुर्शीद के साथ नजर आईं।
उसके बाद कमलादेवी ने‘शंकर पार्वती (1943)’ और ‘धन्ना भगत (1945)’ जैसी फिल्में भी की।
देश के विभाजन के बाद उन्होंने शरणार्थियों के पुनर्वास में अपने आप को लगा दिया। वो गांधी जी, जवाहर
लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू तथा कस्तूरबा गांधी से बहुत प्रभावित थीं।
कमलादेवी चट्टोपाध्याय को 1955 में भारत का उच्च सम्मान पद्म भूषण दिया गया। इसके बाद 1987 में
पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था। 1966 में उन्हें ‘रेमन मैगसेसे पुरस्कार भी दिया गया। 29
अक्टूबर, 1988 में वे स्वर्गवासी हो गईं।

-बाल मुकुन्द ओझा

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