बढ़ते वायु प्रदूषण से खतरे में सेहत
देश में ठण्ड की दस्तक के साथ हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। हालाँकि वायु प्रदुषण की
समस्या विश्वव्यापी है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष प्रदूषित वायु से 70
लाख से अधिक लोगों की असमय मौत हो जाती है। वहीं भारत की राष्ट्रीय राजधानी में हाल के
वर्षों में वायु प्रदुषण में काफी वृद्धि देखने को मिली है। दिल्ली में प्रदुषण के कारण बहुत ही
गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं, इसी के चलते स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
राजधानी दिल्ली में हवा में जहर तेजी से घुलने लगा है। दिल्ली में बढ़ते इस दमघोटू प्रदूषण के
साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ता चला जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदुषण पर
सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के पांच पड़ोसी राज्यों से सवाल किया है कि
उन्होंने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। न्यायालय ने कहा कि कुछ दशकों
पहले यह दिल्ली में सबसे अच्छा वक्त होता था। उसने कहा कि शहर अब बिगड़ती वायु
गुणवत्ता से संकट में है और घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 अक्टूबर 2023 को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश
के 231 में से 18 शहरों में हवा 'बेहतर' रही। वहीं 46 शहरों की श्रेणी 'संतोषजनक' रही जबकि
108 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' रही। वहीं अंकलेश्वर-बल्लभगढ़ सहित 42 शहरों में प्रदूषण
का स्तर दमघोंटू रहा, जबकि बहादुरगढ़ सहित 17 शहरों में प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो गया
है। राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में है। दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स
12 अंक बढ़कर 359 पर पहुंच गया है। दिल्ली के अलावा फरीदाबाद में इंडेक्स 320,
गाजियाबाद में 254, गुरुग्राम में 254, नोएडा में 329, ग्रेटर नोएडा में 375 पर पहुंच गया है।
देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 168 दर्ज
किया गया, जो प्रदूषण के 'मध्यम' स्तर को दर्शाता है। जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 198,
चेन्नई में 129, चंडीगढ़ में 185, हैदराबाद में 101, जयपुर में 156 और पटना में 232 दर्ज
किया गया।
वायु प्रदूषण ने भारत को अपने पंजे में मजबूती से जकड रखा है। भारत की आबोहवा निरंतर
जहरीली होती जा रही है। वैश्विक स्तर पर हवा की गुणवत्ता के बारे में सूचना देने वाली टेक
कंपनी आई क्यू एयर द्वारा जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट के अनुसार भारत 2022 में
दुनिया का आठवां सबसे प्रदूषित देश रहा है । रिपोर्ट में दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 20
शहरों में 19 एशिया के हैं, जिनमें 14 भारतीय शहर हैं। भारत में परिवहन उद्योग देश में 20-
35 प्रतिशत PM2.5 प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। बायोमास ईंधन, औद्योगिक संयंत्रों और
कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों का उपयोग भी वायु गुणवत्ता में गिरावट में योगदान देता
है। दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली चौथे स्थान पर है।
विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए प्रदूषित हवा बिलकुल माकूल नहीं है। यह मुख्य रूप
से कम हवा की गति के कारण हवा में प्रदूषकों के फैलाव की अनुमति नहीं है। इस मौसम में
पॉल्यूशन की समस्या काफी बढ़ जाती है। पराली जलना और वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण
हवा को खराब करने के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं. प्रदूषण की वजह से देश को आर्थिक
नुकसान भी हो रहा है। वायु प्रदूषण पर एक वैश्विक रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दूषित हवा
हमारे स्वास्थ्य के लिए न केवल बेहद हानिकारक है अपितु पेट की आंत सम्बन्धी विभिन्न व्याधियों की
भी कारक है। एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है की वायु प्रदूषण के कारण हमारे शरीर की
आंत के बैक्टीरिया पर गहरा असर पड़ सकता है जिससे मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी के साथ मोटापा,
पेट के आंत के संक्रमण सहित विभिन्न पुरानी बीमारिया बढ़ सकती है। इस रिपोर्ट में यह खुलासा किया
गया है की वाहनों से उत्सर्जित होने वाली खतरनाक गैसें जब सूर्य की रोशनी के संपर्क में आती है तो वे बेहद
खतरनाक रूप धारण कर लेती है जो हमारे स्वास्थ्य पर असर डालती है। रिसर्च के अनुसार वायु प्रदुषण
मनुष्य की श्वास सम्बन्धी प्रणाली पर तो असर डालती है ही साथ ही हमारी आँतों को भी क्षतग्रस्त करती
है। विशेषरूप से पेट सम्बन्धी बीमारिया बढ़ जाती है।