ताइज में हूती की बढ़त, यमन सरकार ने छेड़ा बड़ा सैन्य अभियान
सना। यमन में एक बार फिर सैन्य तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। हूती समूह ने दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए रणनीतिक महत्व वाले अत तुर्बाह शहर में प्रवेश कर लिया है। इस घटनाक्रम के साथ ही सरकार के सामने हूती के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई की चुनौती खड़ी हो गई है।
स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी सैनिकों के दिन में ही शहर से पीछे हट जाने के बाद हूती लड़ाकों को अत तुर्बाह में दाखिल होने के लिए किसी बड़े संघर्ष का सामना नहीं करना पड़ा। सरकारी बल और उनके साथ मौजूद दूसरे लड़ाके शहर के बाहर पहाड़ी क्षेत्रों की ओर चले गए। कुछ सैनिक लड़ाई में हुए नुकसान और सैन्य असफलता के बाद दक्षिण दिशा में पड़ोसी लहज प्रांत की ओर भी निकल गए।
शहर में पहुंचने के बाद हूती लड़ाकों ने मुख्य प्रवेश और निकास मार्गों के साथ कई अहम स्थानों पर अपनी तैनाती कर दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि लड़ाके प्रमुख सड़कों और सरकारी इमारतों के आसपास भी दिखाई दिए। हालात को देखते हुए कई दुकानदारों ने हूती लड़ाकों के पहुंचने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, हूती की ओर से मस्जिदों के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से विरोध नहीं करने की अपील भी की गई। अत तुर्बाह पर हूती का नियंत्रण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2014 के आखिर में यमन संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है, जब समूह ने इस शहर पर कब्जा किया है।
इस बीच यमन की सरकारी सेना को ताइज के दूसरे हिस्सों में भी झटका लगा है। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि हूती लड़ाके अश-शमायातीन और उसके पड़ोसी अल-माफर जिलों के कुछ हिस्सों में आगे बढ़े और कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों से भी सरकारी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा।
हूती की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन और सेना के कमांडर-इन-चीफ राशद अल-अलीमी ने रियाद से बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य हूती के कब्जे में रह गए इलाकों को वापस हासिल करना है।
टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में अल-अलीमी ने कहा कि कई हफ्तों की सैन्य तैयारियों के बाद सरकार अब तैयारी के चरण से सीधे कार्रवाई के दौर में पहुंच गई है। उनके इस बयान से साफ संकेत मिला है कि आने वाले दिनों में सरकारी बल हूती के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान चला सकते हैं।
यमन में हालिया घटनाक्रम की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि लंबे समय से कई मोर्चों पर युद्ध की स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई थी। लेकिन सितंबर की शुरुआत में हूती ने अपना नया सैन्य अभियान शुरू करने के बाद ताइज और पड़ोसी लहज प्रांत में तेजी से पैर पसारे हैं।
हूती ने 10 सितंबर को लाल सागर के किनारे स्थित बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा करने का दावा किया था। इसके अगले दिन मय्यून द्वीप पर भी उसका नियंत्रण स्थापित होने की बात सामने आई। यह द्वीप पेरिम के नाम से भी जाना जाता है और रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। इस क्षेत्र के आसपास भी सैन्य तनाव बढ़ा है।
यमन का मौजूदा संघर्ष 2014 के आखिर में उस समय तेज हुआ था, जब हूती समूह ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया।
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी हद तक थम गई थी। लेकिन ताइज में हूती की नई बढ़त और सरकार की ओर से बड़े सैन्य अभियान की घोषणा ने हालात को फिर संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकारी बल हूती के बढ़ते नियंत्रण को रोक पाते हैं या नहीं।