दलितों पर बढ़ते अत्याचार।
राजस्थान . देश में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं उत्तर प्रदेश इस मामले में अव्वल है वहां देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा अत्याचार के मामले दर्ज हुए हैं जबकि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति को राजनैतिक दृष्टि से मजबूत बना जाता रहा है मायावती जो कि बसपा से थी यहां तीन बार मुख्यमंत्री रहे इसके बावजूद दलित समाज पर कई तरह से अत्याचारों का दौर चल रहा है जबकि यहां पर योगी का राज है और वह पूरे देश में चर्चा का विषय है।यहां अत्याचार होने का एक जातिगत कारण भी है क्योंकि ब्राह्मण और राजपूत यहां पर प्रमुखता से हैं और उनके निशाने पर दलित रहते हैं वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में 13146 दलितों पर अत्याचार के मामले दर्ज किए गए जबकि देश में यह संख्या 50900 थी इस हिसाब से अकेले उत्तर प्रदेश में27 प्रतिशत मामले दर्ज होते हैं। दूसरा नंबर राजस्थान का है जहां 2021 में 7524 मामले दलितों पर अत्याचार के दर्ज हुए यहां संख्या में पिछले 3 वर्ष से लगातार बढ़ोतरी हो रही है सरकार का कहना है कि यहां पर एफ आई आर दर्ज करने की अनिवार्यता करने के कारण सभी तरह के अपराधों में मामले दर्ज होने और मामलों की संख्या बढ़ जाने के साक्ष्य हैं इसमें सत्यता भी है क्योंकि दलित व्यक्ति को अपना मामला दर्ज करा लेना पहले आसान नहीं था परंतु अब आसान है। दलितों पर बढ़ते अत्याचार के मामले मैं मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है जहां वर्ष 2021 में 7214 मामले दलितों पर अत्याचार के दर्ज किए गए।
वैसे तो देश के सभी हिस्सों में दलित समाज पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं क्योंकि इसका कारण यह है कि आरक्षण के कारण इस वर्ग में धीरे-धीरे समृद्धि आ रही है इसके चलते टकराव हो रहा है क्योंकि समाज के कई वर्ग दलितों को अपने बराबर खड़ा नहीं देख पा रहे हैं राजनीतिक रूप से भी दलित वर्ग की अपेक्षा बढ़ गई है दलित वर्ग की कई जातियां उद्योग व्यापार में भी सक्रिय हो गई है और सफल साबित हो रही है सभी क्षेत्रों में दलित बढ़ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी दलित वर्ग में भी आपस में दूरी बढ़ रही है क्योंकि जो समृद्ध हो रहे हैं वही हो रहे हैं और जो पिछड़े हैं वह बिछड़ते जा रहे हैं आरक्षण का लाभ सभी तक पहुंचे इसके लिए सरकार को व्यवस्था करनी होगी तभी दलितों पर अत्याचार के मामलों में कटौती आएगी।