पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, RBI ने जताया भरोसा
Mumbai : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। समिति के सदस्यों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।
एमपीसी सदस्य नागेश कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक बुनियाद को काफी मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले देश की अर्थव्यवस्था उच्च विकास दर और अपेक्षाकृत कम महंगाई की स्थिति में थी, जिसे उन्होंने ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ बताया।
उन्होंने कहा कि भारत के पास लगभग 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो करीब 11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम है। इसके अलावा निर्यात प्रदर्शन और सेवा क्षेत्र की मजबूती के कारण चालू खाता घाटा भी नियंत्रित स्तर पर बना हुआ है।
मिनट्स के अनुसार, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति का भी सकारात्मक असर देखने को मिला है। राजकोषीय घाटा 2022-23 में जीडीपी के 6.5 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 4.4 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सरकार को जरूरत पड़ने पर आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने और बढ़ती लागत के प्रभाव को कम करने की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
आरबीआई ने हालांकि यह भी माना कि महंगाई को लेकर चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ सकता है, जबकि मानसून की स्थिति भी महंगाई के अनुमान को प्रभावित कर सकती है।
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई मार्च में 3.4 प्रतिशत और अप्रैल में 3.5 प्रतिशत रही। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसका प्रमुख कारण रही है। वहीं ईंधन क्षेत्र में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित बनी हुई है।
एमपीसी सदस्य राम सिंह ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू महंगाई के बीच सीधा संबंध है। यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका असर घरेलू महंगाई और चालू खाता घाटे दोनों पर पड़ सकता है।
हालांकि हालिया घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आने वाले समय में महंगाई के दबाव में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आरबीआई का मानना है कि आर्थिक बुनियाद मजबूत होने के बावजूद वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित जोखिम का समय रहते सामना किया जा सके।