फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए भारत के 6500 सुपररिच छोड़ेंगे देश
इस साल देश के करीब 6,500 सुपररिच (HNI) भारत छोड़ देंगे। पिछले साल भी 7,500 सुपररिच भारतीय देश छोड़ कहीं और जा बसे थे। हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अमीरों का देश छोड़ने का सिलसिला तेजी से जारी है। इसकी सबसे बड़ी वजह सुपररिच लोगों की वित्तीय स्वतंत्रता की चाहत है। टैक्स का बोझ बढ़ने, कानून व्यवस्था के कमजोर होने और कोर्ट के फैसलों में होने वाली देरी भी इनके देश छोड़ने की बड़ी वजहों में से हैं। इसके साथ-साथ बिजनेस का बेहतर माहौल न होने पर सुपररिच देश छोड़ देते हैं। साथ ही वे अपना कारोबार भी वहां से समेटने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि चीन से सबसे ज्यादा सुपररिच देश छोड़ रहे हैं।
13,500 सुपररिच छोड़ेंगे चीन
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 13,500 सुपररिच चीन छोड़ देंगे, जबकि पिछले साल 10,800 चीनी अमीर चीन छोड़कर दूसरे देशों में जा बसे थे। चीन और भारत के बाद ब्रिटेन वह तीसरा देश है, जहां से सुपररिच दूसरे देशों में बसने जा रहे हैं। 10 देशों की इस सूची में सबसे खास बात यह है कि भारत वह अकेला देश जहां सुपररिच दूसरे देश छोड़कर यहां बसने आ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया, UAE और सिंगापुर में बस रहे सुपररिच
अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने के लिए दुनिया के सुपररिच की पहली पसंद ऑस्ट्रेलिया है। इस सूची में UAE दूसरे, सिंगापुर तीसरे, अमेरिका चौथे और स्विट्जरलैंड पांचवें नंबर पर है। सुपररिच के देश छोड़ने से सरकार में भरोसा घटता है सुपररिच आमतौर पर बिजनेस से जुड़े होते हैं और उस देश को बड़ी मात्रा में टैक्स देते हैं। उनके बिजनेस से बेरोजगारी कम होती है। बाजार की ग्रोथ तेजी से होती है। उनके देश छोड़ने से अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। सरकार और उसकी नीतियों पर से लोगों का भरोसा घटता है। कौन होते हैं HNI: HNI यानी हाई नेट वर्थ इंडिविजुएल्स ऐसे सुपररिच होते हैं, जिनके पास निवेश करने के लिए कम से कम 1 मिलियन डॉलर (820 करोड़ रुपए) हों।