भारत के निर्यात में 13.84% की उछाल, सितंबर में आंकड़ा 80.75 अरब डॉलर
नई दिल्ली। भारत के विदेशी व्यापार के मोर्चे पर अच्छी खबर सामने आई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश के कुल निर्यात में 13.84 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात बढ़कर 476.20 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 418.31 अरब डॉलर था।
सितंबर 2026 में भी निर्यात का प्रदर्शन सकारात्मक रहा। इस महीने वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 80.75 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो सितंबर 2025 के 72.75 अरब डॉलर के मुकाबले 10.99 प्रतिशत अधिक है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग कई क्षेत्रों में बनी हुई है।
वस्तुओं के निर्यात में 18.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पहली छमाही के दौरान वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-सितंबर 2026-27 में भारत से 259.89 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 219.30 अरब डॉलर था। इस तरह वस्तुओं के निर्यात में सालाना आधार पर 18.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पादों, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों जैसे क्षेत्रों ने निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। सितंबर के आंकड़ों में इलेक्ट्रॉनिक सामान सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।
सेवाओं के निर्यात में भी बढ़ा कारोबार
वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के निर्यात में भी पहली छमाही के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-सितंबर 2026-27 में सेवाओं का अनुमानित निर्यात 216.31 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 199.02 अरब डॉलर था।
हालांकि, सितंबर महीने में सेवाओं का निर्यात थोड़ा घटा। सितंबर 2026 में इसका अनुमानित मूल्य 36.35 अरब डॉलर रहा, जबकि सितंबर 2025 में यह 36.67 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।
सेवाओं के व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अप्रैल-सितंबर 2026-27 के दौरान इस क्षेत्र का व्यापार अधिशेष 102.71 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 98.77 अरब डॉलर था।
सितंबर में आयात भी बढ़ा
निर्यात के साथ भारत के कुल आयात में भी वृद्धि दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2026 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल आयात अनुमानित रूप से 94.05 अरब डॉलर रहा। यह सितंबर 2025 की तुलना में 8.19 प्रतिशत अधिक है।
निर्यात और आयात के इन आंकड़ों के बीच अंतर पर भी नजर रखना जरूरी है। सितंबर में आयात का कुल मूल्य निर्यात से अधिक रहा, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में भारत ने पहली छमाही के दौरान बड़ा व्यापार अधिशेष दर्ज किया।
अमेरिका, सिंगापुर और मलेशिया से मजबूत मांग
निर्यात बाजारों के लिहाज से सितंबर में अमेरिका और एशियाई देशों में भारतीय उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में अमेरिका को निर्यात में 47.99 प्रतिशत, सिंगापुर में 169.16 प्रतिशत, मलेशिया में 119.69 प्रतिशत, मिस्र में 90.09 प्रतिशत और चीन में 24.05 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई।
वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी कई बाजारों में निर्यात तेजी से बढ़ा। अप्रैल-सितंबर 2026-27 के दौरान तंजानिया को निर्यात में 122.51 प्रतिशत, सिंगापुर में 103.05 प्रतिशत, मलेशिया में 82.85 प्रतिशत, चीन में 36.07 प्रतिशत और अमेरिका में 11.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय निर्यातकों को पारंपरिक बाजारों के साथ कुछ अन्य देशों में भी बेहतर अवसर मिले हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान की चमक
उत्पादों के आधार पर देखें तो सितंबर 2026 में इलेक्ट्रॉनिक सामान के निर्यात में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले इसमें 70.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इसके अलावा, अन्य अनाज के निर्यात में 49.88 प्रतिशत, हस्तशिल्प में 43.19 प्रतिशत, मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 35.18 प्रतिशत तथा पेट्रोलियम उत्पादों में 31.90 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
प्लास्टिक और लिनोलियम उत्पादों के निर्यात में 24.81 प्रतिशत, कार्बनिक एवं अकार्बनिक रसायनों में 24.21 प्रतिशत, इंजीनियरिंग सामान में 20.91 प्रतिशत और रत्न एवं आभूषण के निर्यात में 18.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के आंकड़े भारत के निर्यात कारोबार में मजबूत वृद्धि की तस्वीर पेश करते हैं। खास तौर पर वस्तुओं के निर्यात और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। आने वाले महीनों में निर्यात की रफ्तार बनाए रखना और वैश्विक बाजारों में मांग की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।