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प्रगाढ़ और मधुर हो रहे भारत अमेरिका के संबंध

प्रगाढ़ और मधुर हो रहे भारत अमेरिका के संबंध

भारत अमेरिका संबंध आजकल विशेष चर्चा में हैं। दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मधुर हो रहे हैं,यह बहुत अच्छी बात है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में काफी मजबूती देखने को मिली है। जानकारी देना चाहूंगा कि आर्थिक संबंधों के परिणामस्वरूप ही वर्ष 2022-23 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2022-23 में 7.65% बढ़कर 128.55 अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि वर्ष 2021-22 में यह 119.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022-23 में अमेरिका के साथ निर्यात 2.81% बढ़कर 78.31 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है, जबकि वर्ष 2021-22 में यह 76.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर था तथा आयात लगभग 16% बढ़कर 50.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। जानकारी देना चाहूंगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका पधारने का निमंत्रण दिया है और यह जानकारी में आया है कि नरेंद्र मोदी 23 जून को वाशिंगटन में भारतीय- अमेरिकियों की एक सभा को संबोधित करेंगे। यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि कुछ समय पहले ही अमेरिका का भारत के संबंध में एक बड़ा बयान सामने आया है। व्हाइट हाउस ने हाल ही में भारतीय लोकतंत्र को लेकर यह बात कही थी कि भारत का लोकतंत्र एक जीवंत लोकतंत्र है और वहां जाने वाला कोई भी व्यक्ति इसे खुद महसूस कर सकता है। भारत में लोकतंत्र की स्थिति पर चिंताओं को प्रत्यक्ष तौर पर खारिज करते हुए व्हाइट हाउस ने यह बात कही है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि विपक्षी दल समय समय पर लोकतंत्र में बिखराव की बातें करते रहे हैं। बहरहाल, कहना ग़लत नहीं होगा कि अमेरिका का यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के हर बयान के गहरे निहितार्थ होते हैं। कुल मिलाकर अमेरिका ने लोकतंत्र पर यह बयान देकर भारत का पुरजोर समर्थन किया है। वास्तव में यह भारत अमेरिका के बीच दोस्ती का एक नया दौर कहा जा सकता है। जानकारी देना चाहूंगा कि बाइडेन जापान में कुछ समय पहले आयोजित हुए जी-7 सम्मेलन के दौरान भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे को लेकर अपनी उत्सुकता जता चुके हैं। मीडिया के हवाले से यह सामने आया है कि अमेरिकी दौरे पर मोदी कई प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विभिन्न महत्वपूर्ण और द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम रूप देंगे। इस दौरान मोदी अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। यह सब भारत-अमेरिका रिश्तों के निरंतर आ रही प्रगाढ़ता और गर्मजोशी का संकेत है।इससे यह पता चलता है कि भारत- अमेरिका संबंध वैश्विक स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और अमेरिका भारत को एक महाशक्ति के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि दोनों ही देशों में अगले वर्ष चुनाव होने हैं। इसके अतिरिक्त, भारत इस वर्ष जी-20 और शंघाई सहयोगी संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता कर रहा है। एस सी ओ मेंअंतराष्ट्रीय महत्त्व के विभिन्न विषयों पर भारत और अमेरिका के बीच शीर्ष स्तर पर चर्चा होगी। आज भारत वैश्विक स्तर पर रणनीतिक रूप से लगातार अपनी महत्वपूर्ण व अहम भूमिका निभा रहा है। इस यात्रा से सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की भी उम्मीद है। अमेरिका भारत के लिए एक बहुत बड़ा व्यापारिक सहयोगी रहा है और तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए एक बड़ा सहयोगी सिद्ध हो सकता है। इधर चीन भारत और अमेरिका दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन अमेरिका यह बात अच्छी तरह से समझता है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ उसका रिश्ता स्वयं उसके लिए बहुत हितकारी सिद्ध हो सकता है, इसलिए वह भारत के साथ लगातार अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। जानकारी देना चाहूंगा कि भारत-अमेरिका संबंध द्विपक्षीय सहयोग साझा करते हैं। यह व्यापक-आधारित और बहु-क्षेत्रीय है, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, उच्च-प्रौद्योगिकी, असैनिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोग, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि और स्वास्थ्य शामिल हैं। यदि दोनों देश एक दूसरे से हाथ से हाथ मिलाकर इसी प्रकार से काम करते हैं तो यह भविष्य में अमेरिका व भारत दोनों ही देशों के लिए बहुत ही बेनिफिशियल साबित होगा। जानकारी देना चाहूंगा कि पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों ने आतंकवाद, हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया था। उस समय भारत और अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के संबंधों को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी बताया था। बहरहाल, अमेरिका भारत के संबंध नये दौर में प्रवेश कर रहे हैं और एक तरफ़ से इससे चीन को सबक मिल रहा है। अमेरिका इस बात को अच्छी तरह से समझता और जानता है कि भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित किए बिना चीनियों से निपटना इतना आसान नहीं है। भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते यदि कारगर नहीं रहते हैं तो इसमें कोई दोराय नहीं है कि अमेरिका के पोते-पोतियों पर चीनियों का राज होगा। स्वयं अमेरिका ने इस बात को स्वीकार किया है। अमेरिका यह बात पहले ही कह चुका है कि वर्ष 2024 भारत अमेरिका संबंधों के लिए एक बड़ा साल होगा।फिलहाल भारत दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक समूह G20 की अध्यक्षता कर रहा है और भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के लिए जो आधार 2023 में तैयार होगा, उसी के बल पर 2024 में द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊंचाई दिखेगी‌। जानकारी देना चाहूंगा कि इस साल जो बाइडेन भी बतौर राष्ट्रपति पहली भारत यात्रा पर आने वाले हैं।भारत की अध्यक्षता में G20 का सालाना शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में होगा और इससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत बनेंगे। जानकारी देना चाहूंगा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में अब सिर्फ व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्र ही शामिल नहीं रह गए हैं। कई इंडो पैसिफिक रीजन में संतुलन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े पहलू जैसे कई सारे मुद्दे भी जुड़ते गए हैं। निश्चित ही इससे दोनों देशों को बहुत फायदा होगा।

-सुनील कुमार महला

 

 

 

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