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रिटायरमेंट के बाद सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम में करें निवेश

रिटायरमेंट के बाद सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम में करें निवेश

नई दिल्ली। सरकार ने जुलाई-सितंबर (Q2FY26) के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले जितना ही ब्याज मिलता रहेगा। अगर आप रिटायरमेंट के बाद या इससे पहले अपने लिए हर महीने यानी मंथली इनकम का इंतजाम करना चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम अकाउंट (SCSS) सही रहेगा। पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम अकाउंट (SCSS) में एक मुश्त पैसा लगाकर आप अपने लिए रिटायमेंट के बाद भी रेगुलर इनकम का इंतजाम कर सकते हैं। अभी इस पर 8.2% सालाना ब्‍याज मिल रहा है। इस स्कीम में हर 3 महीने में ब्याज दिया जाता है। यानी 3 महीने में अधिकतम 61,500 रुपए तक का ब्‍याज आप हासिल कर सकते हैं, जो मंथली बेसिस पर 20,500 रुपए होगा।


अधिकतम 30 लाख रुपए कर सकते हैं निवेश
पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम के तहत सिर्फ 1000 रुपए में अकाउंट खोला जा सकता है। इस स्कीम में ज्यादा से ज्यादा 30 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। अगर आप इसमें 30 लाख रुपए तक निवेश करते हैं तो आपको 8.2% के हिसाब से सालाना 2,46,000 रुपए ब्याज मिलेगा। चूंकि इस योजना के तहत ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, तो अगर हम इसे 3-3 महीनों में बांटे तो ये 61,500 रुपए होगा। यानी हर 3 महीने में आपके अकाउंट में 61,500 रुपए आ जाएंगे।


5 साल का रहता है मैच्योरिटी पीरियड
इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल का रहता है। यानी इस स्कीम में आपको 5 साल के लिए निवेश करना होता। हालांकि आप 5 साल से पहले भी अकाउंट बंद कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने पर आपको पेनल्टी देनी होती है। इसके अलावा आप 3-3 साल के लिए अकाउंट को जब तक चाहे आगे बढ़ा सकते हैं। अगर आप ऐसा नहीं करना चाहें तो आपके 30 लाख आपस ले सकते हैं।

आपके अकाउंट में आ जाएगा ब्याज का पैसा
ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है। जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर और 1 जनवरी को आपके अकाउंट में आ जाएगा। ब्याज की रकम उसी डाकघर में स्थित आपके बचत खाते में आ जाएगी। यदि खाताधारक ब्याज की रकम नहीं निकालता है, तो ऐसे ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज यानी कम्पाउंड इंटरेस्ट नहीं मिलेगा।

इनकम टैक्स छूट का मिलता है लाभ
इस योजना में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत आप अपनी कुल आय से 1.5 लाख रुपए की कटौती का दावा कर सकते हैं। आसान भाषा में इसे ऐसे समझें, आप सेक्शन 80C के माध्यम से अपनी कुल कर योग्य आय से 1.5 लाख तक कम कर सकते हैं।

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