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सीजफायर का असर : कच्चा तेल धड़ाम, WTI में 17% तक गिरावट

सीजफायर का असर : कच्चा तेल धड़ाम, WTI में 17% तक गिरावट

नई दिल्ली। अमेरिका- इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग को लेकर सीजफायर का ऐलान होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 17 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लुढ़क कर 91.88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट डब्ल्यूटीआई क्रूड टूट कर 91.05 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

इसके पहले पिछले सत्र के दौरान ब्रेंट क्रूड 109.27 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड ने 112.95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पिछले सत्र के कारोबार का अंत किया था। भारतीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे ब्रेंट क्रूड 13.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड 15.20 प्रतिशत लुढ़क कर 95.78 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचा हुआ था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बमबारी पर दो सप्ताह के लिए रोक लगाने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत में ये गिरावट आई है। ट्रंप ने कहा है कि बोले ईरान के साथ विवादित मुद्दों पर सहमति बनी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर उन्होंने बताया कि ये दोतरफा सीजफायर होगा, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और सुरक्षित रूप से फिर से खोलने पर सहमत हो जाए।

पूरी दुनिया में होने वाली कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिये होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण इसके लगभग ठप पड़ जाने से दुनिया भर में उथल-पुथल मच गई है और कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त उछाल आ गया। खासकर, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 70 प्रतिशत तक बढ़ गई।

सीजफायर का ऐलान होने के बावजूद जानकारों का मानना है कि ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह से काम शुरू कर पाना मुश्किल है। जंग की वजह ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का फिजिकल सिस्टम जल्दी ठीक नहीं होने वाला है। खासकर, जंग के कारण बंद हो गए तेल कुओं को फिर से शुरू करने, क्रू और जहाजों को दूसरी जगह भेजने और रिफाइनरी इन्वेंट्री को फिर से बनाने में काफी लंबा समय लगेगा। इसलिए ऑयल मार्केट में आई ये गिरावट एक दो सत्रों में खत्म होने लगेगी और कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर के स्तर के करीब या उसके पार पहुंच कारोबार करने लगेगा।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत का लंबे समय तक बना रहना भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है और फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और बढ़ा सकती है। इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता आ सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंटरेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।

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