ट्रंप-नेतन्याहू की अहम बातचीत, मिडिल ईस्ट पर बढ़ा फोकस
यरूशलम। मध्यपूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच महत्वपूर्ण फोन वार्ता हुई। बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात की समीक्षा की और विभिन्न रणनीतिक मोर्चों पर आपसी तालमेल बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के दौरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदा गतिविधियों की जानकारी साझा की। साथ ही दोनों नेताओं ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया।
वार्ता के दौरान नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और उनके सहयोगियों की ओर से इजरायल को लेकर की गई टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया। हालांकि बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन बयानों का उल्लेख किया गया। हाल के दिनों में तुर्की और इजरायल के बीच बयानबाजी तेज हुई है। एर्दोगन ने इजरायल पर अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया था, जबकि इजरायल ने तुर्की को एफ-35 लड़ाकू विमान दिए जाने की संभावनाओं पर चिंता जताई है।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कथित हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के भीतर कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए।
इस बीच इजरायल ने भी अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। सेना प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि ईरान और लेबनान में हो रही गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए सेना तैयार है।
वहीं रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि इजरायली सेना लेबनान में तब तक मौजूद रहेगी, जब तक हिज्बुल्लाह के हथियार पूरी तरह जब्त नहीं कर लिए जाते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लेबनान में सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए इजरायल को किसी बाहरी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।