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‘पालनहार‘ से रौशन बेबस घरों के चिराग

‘पालनहार‘ से रौशन बेबस घरों के चिराग

कोटा । राज्य सरकार की पालनहार योजना नियति का शिकार होकर बेबस हुए परिवारों के लिए सम्बल बन रही है। ऐसे परिवारों के बच्चे इस योजना की बदौलत शिक्षा का दीप जलाए हुए हैं, पढाई-लिखाई का सपना पूरा कर पा रहे हैं। कोटा मंे 11 हजार से ज्यादा बच्चे इस योजना से जुडकर शिक्षा पा रहे हैं और उनके पालनहार उनकी शिक्षा से रोजगार तक की सुखद उम्मीद बांधे हुए हैं। 
गोविंद नगर निवासी इशिका चौहान तीन भाई बहनों में सबसे बडी हैं। वह 8 वीं कक्षा में पढती हैं। पिता निजी तौर पर वाहन चलाने का कार्य करते थे जिनकी दो साल पहले मृत्यु हो गई तो परिवार पर दुखों का पहाड टूट पडा। मां एक निजी अस्पताल में कार्य करती हैं। ऐसी मुसीबत की घडी मंे पालनहार योजना सहारा बन कर आई। इशिका और चौथी कक्षा में पढने वाले भाई को पालनहार योजना का लाभ मिलने से उनकी पढाई जारी रह पा रही है। वे सरकार को इसके लिए धन्यवाद देती हैं।
इसी तरह अणतपुरा निवासी दिव्यांग दम्पती रविशंकर कश्यप और पत्नी आरती के लिए पालनहार योजना बडा सहारा बनी है। दिव्यांग होने के कारण रवि छोटा मोटा काम ही कर पाते हैं ऐसे में अपनी दो बच्चियों की पढाई लिखाई को लेकर काफी चिंतित थे। पालनहार योजना का लाभ मिलने से दोनों बच्चियों को पर्याप्त राशि पढाई के लिए मिल जाती है। अब रवि और आरती दोनांे बेटियों की पढाई की चिंता से मुक्त हैं। वे कहते हैं कि बच्चों की पढाई की चिंता सरकार ने मिटा दी। मुख्यमंत्री का हम बार-बार धन्यवाद करते हैं।

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