साक्षरता अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है
समाज की बेहतरी के लिए साक्षरता या शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के
लिए हर साल 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय
साक्षरता दिवस 2023 का विषय 'संक्रमण में दुनिया के लिए साक्षरता को बढ़ावा देना, टिकाऊ
और शांतिपूर्ण समाजों की नींव का निर्माण रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र साक्षरता को एक
बुनियादी मानव अधिकार मानता है। वर्तमान में महिलाओं के लिए वैश्विक साक्षरता दर 81
प्रतिशत है, जबकि पुरुषों के लिए यह 89 प्रतिशत है। भारत में वर्तमान में 287 मिलियन के
साथ दुनिया में निरक्षर वयस्कों की सबसे बड़ी आबादी है। यह वैश्विक कुल का 37 फीसदी है।
दुनिया में अभी भी लगभग 773 मिलियन लोग ऐसे हैं जो पढ़ नहीं सकते हैं, जिससे हर सात
में से एक व्यक्ति निरक्षर है। यूनेस्को ने एक नई योजना जारी की है जिसे 2025 तक अपनाया
जाएगा और वर्तमान में साक्षरता चुनौतियों का सामना कर रहे सबसे कमजोर देशों को लक्षित
किया जाएगा। यदि हम यह कहें की साक्षरता और विकास का निकट का सम्बन्ध है तो कोई
अतिश्योक्ति नहीं होंगी।
भारत की कुल साक्षरता 74.4 प्रतिशत है। जिसमें सबसे ज्यादा साक्षरता वाला राज्य केरल है
जहां 93 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर है। जिसमें पुरुष साक्षरता 96 प्रतिशत और महिला साक्षरता
92 प्रतिशत है। सबसे कम साक्षरता वाला राज्य बिहार है जिसकी साक्षरता 63.82 प्रतिशत है।
उत्तर प्रदेश भी पाँच सबसे कम राज्यों में शामिल है। इसी कारण विकास की दौड़ में ये प्रदेश
अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़े हुए है। शिक्षा सभी का जन्मसिद्ध अधिकार है। साक्षरता
विकास का एक ढांचा है। यह लोकतंत्रीकरण का एक मंच है और मानव प्रगति का आखरी
रास्ता है। साक्षरता पढ़ने और लिखने के लिए भाषा का उपयोग करने की एक क्षमता है।देश-
दुनिया से गरीबी को जड़मूल से हटाने, आबादी के विस्फोट को रोकने के साथ जन जन तक लोक
कल्याणकारी कार्यों को पहुँचाने के लिए यह बहुत जरूरी है की प्रत्येक व्यक्ति साक्षर हो। साक्षरता केवल
शिक्षा का उजाला ही नहीं फैलाता अपितु मानव के सुखमय जीवन का मार्ग भी प्रशस्ति करता है। शिक्षा
मानव के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाता है। यह किसी देश को तरक्की और विकास के
रास्ते पर ले जाने की बुनियाद है। साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी है। साक्षरता और
कौशल विकास का चोली दामन का साथ है। साक्षरता की सफलता रोजगार से जुडी है। हम साक्षर व्यक्ति
को रोजी रोटी की सुविधा सुलभ करा कर देश से निरक्षरता के अँधेरे को भगा सकते है। हालाँकि केंद्र और
राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित कर रही है मगर जब तक ऐसे
व्यक्ति अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे तब तक साक्षरता अभियान को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा
सकता।
साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और
कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है। इसका सामाजिक एवं
आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। साक्षरता का कौशल मानव में आत्मविश्वास का संचार करता है। गरीबी
उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच समानता के लिए जरूरी है
कि महिलाएं भी साक्षर बनें। जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। साक्षरता में वो
क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का
उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय तथा समाज के हर वर्ग को साक्षरता का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है।