भर्ती प्रक्रिया में लॉटरी सिस्टम को अपनाया जाय
वैर . वाल्मीकि महापंचायत के संभाग प्रभारी पूर्व पार्षद महिपाल जादौ ने महामहिम राज्यपाल को पत्र भेजकर सफाई कर्मचारियों की भर्ती में बाल्मीकि समाज को अनुभव प्रमाण पत्र से मुक्ति दिलाने सहित पारदर्शिता पूर्वक भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराने की मांग की है, जादों ने पत्र में लिखा है कि बजट सत्र - 2023-24 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट सत्र के अभिभाषण में 30,000 हज़ार सफाई कर्मचारियों की भर्ती की घोषणा की थी जिसकी क्रियान्विति में राज्य सरकार द्वारा 13184 पदों पर 20 जून 2023 से आवेदन मांगे जा रहे हैं। जिसमें भर्ती "इन्टरव्यू" के माध्यम से की जा रही है जबकि राज्य सेवा नियमों में सफाई कर्मचारी का पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से भी नीचे आता है । इसलिए केन्द्र सरकार ने भी सत्र 2014 में चतुर्थ श्रेणी पदों के "इन्टरव्यू" समाप्त कर दिए हैं। जबकि नियमानुसार सफाई कर्मचारी के पदों पर इन्टरव्यू आवश्यक नहीं है । भर्ती में इन्टरव्यू प्रक्रिया से पूरी तरह भ्रष्टाचार का बोलबाला होगा। और वाल्मीकि समाज परम्परागत रूप से जन्म-जन्मांतर सफाई कार्य करता आ रहा है इसलिए वाल्मीकि समाज के लोगों के लिए अनुभव की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
बर्ष 2018 में भाजपा शासन काल में 21136 पदों पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष पारदर्शिता के साथ लॉटरी के माध्यम से जिला कलेक्टर की निगरानी मे सम्पन्न हुई जिसमें सभी तबके के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिला। किसी भी प्रकार की धांधली व भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
मान्यवर ये भर्ती यदि लॉटरी के माध्यम से नहीं कराई जाती है तो इसमें ग़रीब बेरोजगार व्यक्ति को भारी नुकसान होगा । क्योंकि उसके पास इतनी मोटी रकम न होने के कारण वो इस भर्ती से कोसों दूर हो जाएगा। और उसके सपनों पर पानी फिर जाएगा। कई हज़ार बेरोजगार युवा ओवर एज हो जाएंगे। और कई परिवार इस भर्ती में वर्षों तक कर्ज़े में डूब जाएंगे।