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ग्राम पंचायत ग्रामीण विकास अवधारणा की मुख्य धूरी- जिला कलक्टर

ग्राम पंचायत ग्रामीण विकास अवधारणा की मुख्य धूरी- जिला कलक्टर

पाली. जिला कलक्टर नमित मेहता ने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास अवधारणा की मुख्य धूरी हैं। उन्हीं की माध्यम से ग्रामीण विकास योजनाओं की बेहतर क्रियान्विति करते हुए अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति के उत्थान के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। जिला कलक्टर मेहता शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में जिला स्तरीय राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए स्वीकृत होने वाले बजट का अधिकांश भाग ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही खर्च हो रहा है। ऐसे में सरपंच तथा पंचायत कोरमों की जिम्मेदारी भी बढ जाती है। हमारा दायित्व है कि सरकार जिस उद्देश्य से पैसा दे रही है, वह उद्देश्य पूरा हो। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सभी टीम के रूप में कार्य करें, ताकि आमजन को योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने खेलो पाली अभियान में जिले की सभी ग्राम पंचायतों की ओर से मिल रहे सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पुरस्कार प्रोत्साहन देते हैं, लेकिन इससे भी अधिक आत्मसंतुष्टि तब मिलती है, जब आपके माध्यम से किसी आहत को राहत मिले। इसलिए सभी अधिकारी-कर्मचारीगण और जनप्रतिनिधि आमजन को राहत पहुंचाने की मंशा के साथ कार्य करें।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत 300 तरह के कार्य अनुमत है, लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से आने वाले प्रस्तावों में विविधता नहीं होती। अधिकांश कार्य सीसी सडक, नाडी निर्माण तक ही सीमित रहते हैं। उन्होंने आगामी वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत गांवों के समग्र विकास को लेकर प्रस्ताव तैयार कर प्रेषित करने का आग्रह किया। उन्होंने ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजकीय नियमों की पालना उनका दायित्व है। इसमें किसी प्रकार की कौताही नहीं बरती जाए। उन्होंने अवगत कराया कि जल्द ही 129 नए ग्राम विकास अधिकारियों की नियुक्ति होनी है। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मती दीप्ति शर्मा ने विकास की समग्र परिभाषा बताते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें सिर्फ सीसी सडक, नाडी निर्माण, ब्लॉक लगाने जैसे कामों तक ही सीमित नहीं रह कर समेकित विकास पर ध्यान दें। पंचायत में स्वच्छता, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, बाल एवं महिला हितैषी आदि मानकों पर भी कार्य करने की आवश्यकता है, तभी समग्र विकास का स्वप्न साकार होगा।
प्रारंभ में जिला आयोजना अधिकारी रामदयाल राठौड ने राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्र धोलिया सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचगण, ग्राम विकास अधिकारीगण आदि भी उपस्थित रहे। संचालन सहायक विकास अधिकारी अरूण वैष्णव ने किया।
निर्भरता कम कर स्वयं करें नेतृत्व
जिला कलक्टर ने महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि महिला सरपंच अन्य पर निर्भरता कम कर स्वयं नेतृत्व करें। वर्तमान में जिला परिषद सीईओ तथा जिला प्रमुख भी महिलाएं हैं। उनसे प्रेरित होकर काम करें।
इन ग्राम पंचायतों को मिला सम्मान
कार्यक्रम में नौ श्रेणियों में ग्राम पंचायतों को प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। इसमें गरीबी मुक्त और बेहतर आजीविका श्रेणी में प्रथम नाडोल, द्वितीय आगेवा व तृतीय खिमाडा, स्वस्थ गांव श्रेणी में प्रथम ढोला, द्वितीय नाडोल व तृतीय मांडीगढ, बाल हितैषी गांव श्रेणी में प्रथम देसूरी, द्वितीय बिठोडा कला व तृतीय लापोद, पर्याप्त पानी वाली पंचायत श्रेणी में प्रथम चिताड, द्वितीय चण्डावल तथा तृतीय ढारीया रही। इसी प्रकार स्वच्छ और हरित गांव श्रेणी में प्रथम बासना, द्वितीय चण्डावल व तृतीय हरीयामाली, आत्मनिर्भर बुनियादी संरचना श्रेणी में प्रथम चण्डावल, द्वितीय नाडोल व तृतीय केलवाद, सामाजिक रूप से संरक्षित गांव श्रेणी में प्रथम कराडी, द्वितीय लापोद व तृतीय रेन्दडी, सुशासन वाले गांव श्रेणी में प्रथम चण्डावल, द्वितीय हरीयामाली व तृतीय बासना तथा महिला हितैषी पंचायत श्रेणी में प्रथम आसरलाई, द्वितीय धणा व तृतीय लापोद ग्राम पंचायत रही।

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