8 बैंकों में चल रहा साइबर सुरक्षा का बड़ा पायलट
मुंबई। डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा भी सरकार और नियामकों के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है। इसी दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने के लिए इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (IDPIC) को आगे बढ़ा रहा है।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान आईएएनएस से बातचीत में बताया कि IDPIC फिलहाल आठ बैंकों के साथ पायलट आधार पर संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इसके व्यापक क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।
फ्रॉड की जानकारी रियल टाइम में साझा करने का लक्ष्य
IDPIC की परिकल्पना बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच साइबर फ्रॉड से जुड़ी जानकारी और चेतावनियों को तेजी से साझा करने के लिए की जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसा तंत्र तैयार करना है, जिससे किसी संदिग्ध गतिविधि या संभावित धोखाधड़ी के बारे में संबंधित संस्थानों को समय रहते जानकारी मिल सके।
इस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में धोखाधड़ी के पैटर्न को समझने और संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार और आरबीआई पिछले कुछ समय से डिजिटल वित्तीय सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और ग्राहकों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई कदम उठा रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट बढ़ा, लेकिन नकदी अभी भी महत्वपूर्ण
मुर्मू ने देश में भुगतान के बदलते तरीकों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नकदी की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है।
उनके मुताबिक, भुगतान के माध्यम के तौर पर नकदी का इस्तेमाल धीरे-धीरे डिजिटल विकल्पों की ओर जा रहा है। हालांकि, स्टोर ऑफ वैल्यू यानी मूल्य संचय के रूप में नकदी की भूमिका अभी भी बनी हुई है और इसमें कोई बड़ी गिरावट नहीं दिखाई दे रही।
उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि अगर डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ उसी अनुपात में नकदी का इस्तेमाल कम होता, तो प्रचलन में मौजूद नकदी में ज्यादा स्पष्ट गिरावट दिखाई देती। लेकिन अभी ऐसा बड़े पैमाने पर नहीं हुआ है।
अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
डिप्टी गवर्नर ने बताया कि घरों और व्यक्तियों के पास मौजूद नकदी की मात्रा देश की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ी होती है। दूसरी तरफ, अर्थव्यवस्था में बढ़ती औपचारिकता डिजिटल भुगतान के विस्तार को गति दे रही है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था लगातार अधिक औपचारिक हो रही है और इस दिशा में डिजिटल भुगतान के आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। उनके अनुसार, डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार मजबूत हो रहा है।
एक साल में 600 से ज्यादा सर्कुलर
आरबीआई के नियामकीय कामकाज की रफ्तार पर भी मुर्मू ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान केंद्रीय बैंक ने 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन सर्कुलर जारी किए हैं।
उन्होंने कहा कि आरबीआई ने विनियमित संस्थाओं को करीब 11 अलग-अलग श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत किया है। अलग-अलग श्रेणियों के लिए नियमों को उसी हिसाब से जारी करने की जरूरत के चलते सर्कुलरों की संख्या अधिक दिखाई देती है।
इस पूरी प्रक्रिया के बीच IDPIC का पायलट डिजिटल भुगतान से जुड़े जोखिमों की निगरानी और फ्रॉड इंटेलिजेंस साझा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।