(मिग-21 हादसा) उड़ते ताबूत आखिर कब तक ?
हाल ही में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के बहलोलनगर गांव में भारतीय वायुसेना का मिग-21 फाइटर जेट विमान क्रैश होकर एक घर पर गिर गया जिससे हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि तीन महिलाएं घायल हो गई।हालांकि फाइटर जेट के पायलट और को-पायलट इस हादसे में सुरक्षित बच गए। मीडिया के हवाले से खबरें मिली हैं कि हादसे के दौरान पायलट और को-पायलट ने पैराशूट के जरिए कूदकर अपनी जान बचा ली, लेकिन मकान पर विमान गिरने से आसपास के लोग इसकी चपेट में आ गए। मिग-21 के क्रैश होने का यह पहला मामला नहीं है, अनेकों बार मिग-21 के क्रैश होने की घटनाएं हमारे यहाँ हो चुकी हैं और यही कारण भी है कि इनको अब 'उड़ते हुए ताबूत' तक की संज्ञा दे दी गई है। दरअसल इस लड़ाकू जहाज की लैंडिंग स्पीड ही 300 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। तो आसमान में इसकी रफ्तार का अंदाजा हम आसानी से लगा सकते हैं कि इतनी स्पीड कितनी होती होगी। इतनी अधिक स्पीड वाले फाइटर को उड़ाना कभी भी आसान काम नहीं होता है और इसे उड़ाने के लिए बहुत ही धैर्य, उच्च प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। यहाँ जानकारी देना चाहूंगा कि वर्ष 2021 में पांच मिग-21 विमान हादसे हुए थे। इससे पहले 2013 में दो, 2014 में तीन, 2015 में दो, 2016 में तीन, 2018 में दो, 2019 में तीन और 2022 में राजस्थान के बाड़मेर में मिग-21 क्रैश हुआ था। राजस्थान में हुए इस हादसे में तो दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने 2012 में MIG-21 से जुड़े विमान हादसों को लेकर एक बयान जारी किया था। उन्होंने बताया था कि वायु सेना में शामिल होने के बाद से लेकर साल 2012 तक 482 मिग-21 विमान हादसे के शिकार हो चुके थे। इन हादसों में 171 पायलट, 39 आम नागरिक और आठ अन्य की मौत हुई थी। आखिर मिग-21 है क्या ? और इनके क्रैश होने के पीछे कारण क्या है ? यदि हम यहाँ इसकी बात करें तो हमें जानकारी मिलती है कि मिग-21 एक सुपरसोनिक फाइटर प्लेन है और इसे रूस द्वारा तैयार किया गया है। दरअसल, इसका निर्माण सोवियत संघ(अब रूस) के मिकोयान-गुरेविच डिज़ाइन ब्यूरो ने किया है। इसे "बलालैका" के नाम से बुलाया जाता था क्योंकि यह रुसी संगीत वाद्य ऑलोवेक ( यानी कि पेन्सिल) की तरह दीखता था। वास्तव में, इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक व इसका इंजन काफी पुराना है। ये सिंगल या यूं कहें कि एक ही इंजन वाला फाइटर प्लेन होता है, जिसमें थोड़ी सी गड़बड़ी पर ही आग लगने की संभावना बन जाती है। जांच में यह बात सामने आई है कि इसकी खिड़कियों की डिजाइन में भी कुछ गड़बड़ी पाई गई है, जिसकी वजह क्रैश जैसे हादसे जन्म लेते हैं। जानकारी मिलती है कि इसे 2025 में रिटायर किया जाएगा। जानकारी देना चाहूंगा कि इसने अपनी पहली उड़ान साल 1955 में भरी थी और भारतीय वायु सेना में साल 1963 में शामिल किया गया था। वैसे 1963 के समय में मिग-21 बहुत ही उन्नत किस्म के विमानों में से एक माना जाता था। और शायद यही कारण था कि भारत ने कुल 874 मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया। खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर विमानों का निर्माण भारत में ही किया गया है। मिग-21 के बारे में एक बात यह भी है कि मिग-21 को उड़ाने के लिए बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत होती है और इसका प्रशिक्षण(ट्रेनिंग) बहुत ही कठोर होता है। जानकारी देना चाहूंगा कि रूस इस फाइटर प्लेन(मिग-21) को आज से बहुत पहले यानी कि वर्ष 1985 में ही रिटायर कर चुका है, लेकिन भारतीय सेना में आज भी इन फाइटर जहाजों का इस्तेमाल हो रहा है। वास्तव में, इस फाइटर जहाज की यह खासियत रही है कि यह कभी धोखा नहीं देता, बशर्ते कि इसे पूरी सावधानी एवं सूझबूझ व बेहतरीन ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद उड़ाया जाए। साल 1971 की लड़ाई में इस सुपरसोनिक फाइटर जहाज की मार से दुश्मन बुरी तरह से कांप उठा था। उस समय ग्राउंड अटैक में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया था और रिजल्ट बहुत ही बेहतरीन थे। जानकारी मिलती है कि ढाका के गवर्नर हाउस पर मिग-21 ने ही अटैक किया था। इसके अलावा दुश्मन व पड़ौसी देश पाकिस्तान के साथ 1965 और 1999 की लड़ाई में भी इस लड़ाकू जहाज ने खुद को साबित कर दिखाया था। अब इस जहाज के क्रैश होने की घटनाएं इतनी ज्यादा हो चली हैं कि इसे 'उड़ता ताबूत' और 'विधवा बनाने वाला' तक कहा जाने लगा है। हालांकि बीच में इस जहाज के अपग्रेडेशन(हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) का काम भी चला। आज के समय में दुनिया के अधिकांश देश मिग-21 से किनारा कर चुके हैं, लेकिन हमारे यहाँ अब भी इनकी उड़ान जारी है। जानकारी देना चाहूंगा कि बहुत पहले इस विमान की उच्च गुणवत्ता को देखकर ही इसे दुनिया के करीब साठ देशों ने अपने लड़ाकू जहाजों के बेड़े में 'मिग-21' सुपरसोनिक को शामिल किया गया था लेकिन अब ये बहुत पुराने हो चुके हैं। आज इन फाइटर जहाजों के स्पेयर पार्ट्स का बैकअप ठीक से नहीं मिल रहा है और रूस ने बहुत पहले ही इन जहाजों का निर्माण बंद कर दिया है, तो ऐसे में स्पेयर पार्ट्स का संकट उठ खड़ा हुआ है और पहले वाले पुर्जों से ही काम चल रहा है। एयर फ्रेम को अपग्रेड करना संभव नहीं है और मिग-21 को अब इसकी समय सीमा से ज्यादा उड़ाया जा चुका है। जानकारी मिलती है कि अभी तक 400 से अधिक मिग लड़ाकू जहाज, क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में वायुसेना के 200 से अधिक पायलट शहीद हो गए हैं। इसके अलावा ढाई सौ से ज्यादा सामान्य लोगों ने भी इन हादसों में अपनी जान गंवाई है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास तीन मिग-21 स्क्वाड्रन हैं, जिनमें कुल लगभग 50(पचास) विमान हैं। जानकारी मिलती है कि भारतीय वायुसेना ने पिछले साल मिग-21 लड़ाकू स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए तीन(03) साल की समयसीमा तय की थी। यहाँ तक कि वायुसेना की योजना अगले पांच साल में मिग-29 लड़ाकू विमानों के भी तीन स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है। अब राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के बहलोलनगर गांव में हाल ही में मिग-21 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक बार फिर भारतीय वायु सेना के सोवियत मूल के पुराने हो चुके विमानों के बेड़े पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। हालांकि मिग-21 फाइटर प्लेन को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना पटरी पर बताई जा रही है, लेकिन चरणबद्ध योजना प्लेटफार्मों से जुड़ी हालिया दुर्घटनाओं से संबंधित नहीं है। आज वायुसेना का लगातार आधुनिकीकरण हो रहा है, तेजस और राफेल जैसे अत्याधुनिक विमानों की खरीदारी की जा रही है। हाल फिलहाल, यह बहुत अच्छी बात है कि सरकार की योजना है कि मिग-21 विमानों को चरणबद्ध तरीके से 2025 तक वायुसेना के बेड़े से बाहर कर दिया जाए लेकिन बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तब तक न जाने और कितने मिग-21 विमानों के साथ हम अपने जाबांज पायलटों को खो देंगे।
-सुनील कुमार महला