विधानसभा में विधायक मेघवाल ने डोली भूमि का मुद्दा उठाया
जायल - विधायक डॉ मंजू देवी मेघवाल ने राजस्थान विधानसभा में प्रकिया एवं संचालन नियमों के नियम 295 के तहत विशेष उल्लेख प्रस्ताव में बताया कि आजादी से पूर्व रियासत काल मे मन्दिरो / मस्जिद में सेवा करने वाले विशेष वर्ग परिवारों के भरण पोषण हेतु कृषि भूमिया जोतने हेतु दी जाती थी,उक्त भूमियों पर किसी प्रकार का लगान कर नही लगता था ,ऐसी भूमि को डोली,भोम आदि नामो से वर्गीकत किया गया था और इसी अनरूप राजस्व अभिलेख में भूमियों की किस्म दर्ज कर दी गई , राजस्थान कास्तकारी अधिनियम 1955 के तहत समस्त भूमियों की भांति इन भूमियों पर कब्जा कास्त के आधार पर खातेदारी अधिकार प्रदान किये गये थे एव अन्य भूमियों की तरह इनका उपयोग ओर उपभोग निबोध रूप से चल रहा था लेकिन राज्य सरकार के 1991 में जारी परिपत्र द्वारा डोली भूमि का खातेदारी अधिकार विलोपित करते हुए भूमि को मन्दिर मूर्ति के नाम दर्ज कर दिया गया जिससे सभी अधिकार प्रतिबंधित हो गये जिससे कास्तकार विभिन्न योजनाओं से वंचित हो गये, विधायक ने बताया कि इस भूमि के काश्तकार पुजारी है जो अत्याधिक कमजोर वर्ग है और आजीविका का दूसरा कोई विकल्प नही है अतः प्रदेश की समस्त डोली भूमि का सर्व करवाकर खातेदारी अधिकार प्रदान किया जाये जिससे इस वर्ग को राहत मिल सके। विधायक द्वारा डोली भूमि की मांग विधानसभा में उठाने पर समस्त पुजारी सेवक समाज ने विधायक डॉ मेघवाल का आभार जताया।