अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर से मोदी सरकार बल्ले बल्ले
बाल मुकुंद ओझा
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर है। परस्पर विरोधी खबरों के बावजूद कुछ अच्छी खबरें मिलने से मोदी सरकार एक बार फिर बल्ले बल्ले है। देश की अर्थव्यवस्था में मिले सुधार के संकेतों से मोदी सरकार को सुकून मिला है। भारत की इकॉनमी और मजबूत हुई है। खाड़ी युद्ध और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने इस साल सभी को चौंका दिया है। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत उम्मीद से बेहतर की है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी 7.8 फीसदी बढ़ी। यह बाजार के 7.3 फीसदी के अनुमान से ज्यादा रही। खास बात यह है कि इस तेजी के पीछे सिर्फ आम लोगों का खर्च नहीं रहा। कंपनियों का निवेश, निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने ग्रोथ को ज्यादा ताकत दी। पहली तिमाही में निवेश 11.9 फीसदी और निर्यात 12 फीसदी बढ़ा। इसके मुकाबले आम लोगों के खर्च यानी निजी खपत में 7.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। हालांकि, पिछली तिमाही में दर्ज 8.6 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले इसमें कमी आई है। वहीं, एक साल पहले की समान तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रही थी। इस प्रदर्शन के साथ भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती बताया। उन्होंने वैश्विक संकट, युद्ध और सप्लाई चेन बाधाओं के बावजूद भारत की तेज रफ्तार की सराहना करते हुए 'झूठ की गूंज' फैलाने वालों पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार की विकासोन्मुख नीतियों और सुधारों के सकारात्मक प्रभाव के साथ साथ देशवासियों की मेहनत और उद्यमशीलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय देश के लोगों के संकल्प और मेहनत को दिया।
भारतीय अर्थव्यवस्था अब मोदी सरकार के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वर्ष 2025 अच्छा रहा। वर्ष 2026 में भी यह रफ़्तार जारी रहने की उम्मीद है। आशा की जा रही है चालू वर्ष भारत की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के लिए काफी सुकूनदायी साबित होगा है।
जीडीपी को लेकर देश में भारी चर्चा हो रही है। आखिर ये जीडीपी है क्या और इसकी इतने व्यापक स्तर पर चर्चा क्यों हो रही है। यह जानना देशवासियों के लिए बहुत जरुरी है। कहां से आया इसका विचार। जीडीपी को सबसे पहले अमेरिका के एक अर्थशास्त्री साइमन ने 1935-44 के दौरान इस्तेमाल किया था। इस शब्द को साइमन ने ही अमेरिका को परिचय कराया था। यह वह समय था जब विश्व की बैंकिंग संस्थाएं आर्थिक विकास का अनुमान लगाने का काम संभाल रहीं थी उनमें से ज्यादातर को एक शब्द इसके लिए नहीं मिल पा रहा था। जब साइमन ने इस शब्द से अमेरिका की कांग्रेस में इस जीडीपी शब्द को परिभाषित करके दिखाया तो उसके बाद अंतरराष्ट्री मुद्रा कोष ने इस शब्द को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। तभी से यह शब्द सब के उच्चारण में आगया।
जीडीपी को सरल भाषा में हम सकल घरेलू उत्पाद कहते है। किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है जीडीपी। जीडीपी किसी निश्चित अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है। ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए। भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है। ये आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है। सरल शब्दों में अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुकाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख है।