भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन
-गोविन्द शर्मा
विश्व में भारतीय संस्कृति अनुपम है यहां की संस्कृति में जहां विविधता में एकता के दर्शन होते है वही यह त्योहार राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता का सन्देश भी हैं। त्यौहारों का यह भारत देश, विश्व मे आकर्षण का केन्द्र है।यहां हर त्यौहार का अपना रंग, अपना भाव है। पर कुछ त्यौहार मन से जुड़े होते हैं। रक्षाबंधन ऐसा ही त्यौहार है। यह कोई धार्मिक कर्मकांड से ज्यादा, दो दिलों के रिश्ते का उत्सव है। सावन का महीना, पूर्णिमा का दिन, बहन की थाली में सजी राखी और भाई की कलाई - यही रक्षाबंधन का मनोहर दृश्य है। 'रक्षा' का अर्थ है सुरक्षा और 'बंधन' का अर्थ है बंधन। अर्थात सुरक्षा का बंधन। यह धागा बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है और भाई आजीवन उसकी रक्षा का वचन देता है। इसका इतिहास बहुत पुराना है।एक पौराणिक कथा है जब भगवान श्रीकृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। उसी ऋण को कृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर चुकाया। एक अन्य कथा और हैं,,मेवाड़ की रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान से अपने राज्य को बचाने के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने राखी का मान रखते हुए मेवाड़ की मदद की थी। इससे पता चलता है कि राखी केवल खून के रिश्ते तक सीमित नहीं, यह मन का रिश्ता है। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें सुबह से तैयारियां करती हैं। थाली में कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी सजाई जाती है। भाई के माथे पर तिलक लगाकर, आरती उतारकर बहन उसकी कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र और सुख की कामना करती है। भाई बहन को उपहार देता है और कहता है - "तू चिंता मत कर, मैं हमेशा तेरे साथ हूँ।" आजकल भाई विदेश में या दूर शहरों में होते हैं तो राखी डाक से, कूरियर से या ऑनलाइन वीडियो पर बंधती है। पर प्यार वही रहता है। पहले बहन अबला मानी जाती थी, जिसे भाई की रक्षा चाहिए। आज बहन सबला है। वह डॉक्टर है, अफसर है, फौजी है। आज रक्षा एकतरफा नहीं रही। अब कई जगह भाई भी बहन को राखी बांधते हैं, ताकि वह भी उसकी रक्षा करे। स्कूलों में बच्चे सैनिकों को राखी भेजते हैं - "आप देश की रक्षा करते हो, आप हमारे भाई हो।" कई बच्चे पेड़ों को राखी बांधते हैं - "आप हमारी रक्षा करते हो।" रक्षाबंधन अब केवल परिवार का त्यौहार नहीं, सामाजिक एकता का त्यौहार बन गया है यह त्यौहार हमें दो बड़ी सीख देता है -पहला -नारी का सम्मान करो। हर लड़की किसी की बहन है। राखी बांधते ही हम यह प्रण लें कि हम समाज की हर बहन-बेटी की इज्जत करेंगे और उनकी सुरक्षा करेंगे। रिश्तों को समय दो। आज की भागदौड़ में हम मोबाइल में व्यस्त हैं। यह त्यौहार हमें रोककर कहता है - अपनों से मिलो, बात करो। भाई-बहन का रिश्ता बचपन की लड़ाई, जवानी की दोस्ती और बुढ़ापे का सहारा है। भाई चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, बहन के लिए वह वही छोटा लड़का है जो उसका खिलौना तोड़ देता था। और बहन चाहे कितनी भी बड़ी हो जाए, भाई के लिए वह वही छोटी गुड़िया है जो शिकायत लगाती थी। राखी का धागा बहुत कच्चा होता है, पर उसका प्यार बहुत पक्का होता है। बाजार में दस रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक की राखी मिलती है, पर भावना की कीमत अनमोल है। इस रक्षाबंधन पर हम सिर्फ धागा नहीं, भरोसा बांधें। सिर्फ मिठाई नहीं, मीठे बोल बांटें। और वादा करें कि हम अपने भाई-बहन के रिश्ते को जीवन भर ऐसे ही पवित्र रखेंगे।