मणिपुर में 25 साल बाद मूवी की स्क्रीनिंग
रेप्लिका गन्स और उरी फिल्म दिखाई गई; हिंसा के बीच स्वतंत्रता दिवस मना, कुकी ने निकाली परेड
मणिपुर . मणिपुर में चल रही हिंसा के बीच करीब 2 दशक के बाद हिंदी फिल्म रेप्लिका गन्स और उरी की स्क्रीनिंग हुई। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आदिवासी संस्था हमार स्टूडेंट्स एसोसिएशन (HSA) ने इसका प्लान किया था।HSA ने 14 अगस्त को एक बयान जारी किया था। इसमें कहा- ये पहल मणिपुर के उन आतंकी संगठनों के विरोध में है, जिन्होंने कई दशकों से आदिवासियों को गुलाम बनाकर रखा है। HSA ने मणिपुर के लोगों से अपील की कि इस लड़ाई में हमारा साथ दें।वर्ष 2000 के बाद किसी भी हिंदी फिल्म की यह पहली स्क्रीनिंग है। यहां पर कुछ विद्रोही समूहों ने बॉलीवुड फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था। वैसे मणिपुर के उखरूल जिला में कड़े सुरक्षा के बीच इस साल मार्च में शाहरुख खान-स्टारर 'पठान' मूवी भी दिखाई गई थी। मणिपुर में 12 सितंबर 2000 से हिंदी फिल्म की स्क्रीनिंग बैन HSA ने बताया कि मणिपुर में आखिरी बार 1998 में हिंदी फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ की स्क्रीनिंग की गई थी। इसके बाद प्रतिबंधित संगठन रेवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF) ने 12 सितंबर 2000 से हिंदी फिल्म की स्क्रीनिंग पर बैन लगा दिया। बैन लगाने के एक हफ्ते के भीतर RPF ने हिंदी भाषा के 6,000 से 8,000 वीडियो-ऑडियो कैसेट और कॉम्पैक्ट डिस्क जला दिए थे। इसका कारण बताया गया कि बॉलीवुड से समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मणिपुर की चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम की खुद की बायोपिक भी उनके गृह राज्य में रिलीज नहीं हुई। मणिपुर में मंगलवार को हिंसा के बीच स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। कुकी समुदाय के लोगों ने हथियार लेकर परेड किया। जिस पर रिटायर्ड जनरल निशिकांत सिंह ने ट्वीट कर कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर परेड में हथियार लेकर सुरक्षाबल ही प्रदर्शन करते हैं। लेकिन हथियारों से लैस कुकी उग्रवादियों को देखकर हैरान हूं। इसके जरिए कुकी संदेश देना चाह रहा है कि कुछ भी करके बचा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा- मैतई लोगों को सरकार पर भरोसा करना चाहिए। फिर भी वे अपनी लड़ाई के लिए तैयार रहें।4 पॉइंट्स में समझें मणिपुर में क्यों हो रही हिंसा...
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।
मणिपुर में 3 मई से हिंसा, अब तक 160 से ज्यादा मौतें
मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच 3 मई से हिंसा जारी है। इसमें अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 3-5 मई के बीच 59 लोग, 27 से 29 मई के बीच 28 लोग और 13 जून को 9 लोगों की हत्या हुई थी। 16 जुलाई से लेकर 27 जुलाई तक हिंसा नहीं हुई थी।