युवाओं में शराब सेवन पर खुली चर्चा, विशेषज्ञों ने बताए खतरे
जयपुर। युवाओं में शराब सेवन के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े मानसिक स्वास्थ्य पहलुओं को लेकर शुक्रवार को पूर्णिमा इंजीनियरिंग कॉलेज में पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) जयपुर और सृजन फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से हुए कार्यक्रम का विषय “Alcohol & Young Minds: Choice, Coping or Addiction?” रहा।
कार्यक्रम में युवाओं के बीच शराब सेवन के पीछे मौजूद अलग-अलग कारणों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने व्यक्तिगत पसंद, तनाव, तनाव से निपटने के तरीके, साथियों का दबाव, भावनात्मक परेशानियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे पहलुओं को चर्चा में शामिल किया।
कब प्रयोग बन सकता है निर्भरता का कारण?
पैनल में इस बात पर भी संवाद हुआ कि कई बार सामान्य रुचि या प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ शराब सेवन धीरे-धीरे नियमित आदत में बदल सकता है। लंबे समय तक जारी रहने पर यही आदत निर्भरता या लत का रूप ले सकती है।
विशेषज्ञों ने युवाओं को अपनी परेशानियों से निपटने के लिए शराब या अन्य नशे को सहारा नहीं बनाने की सलाह दी। इसके बजाय स्वस्थ तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सामाजिक जुड़ाव, परिवार और दोस्तों से बातचीत तथा जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञों से सहायता लेने पर जोर दिया गया।
विद्यार्थियों ने भी पूछे सवाल
कार्यक्रम में डॉ. एस.एम. स्वामी, राज्य नोडल अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, जयपुर मुख्य वक्ता रहे। डॉ. रवि गुप्ता, UNICEF ने भी वक्ता के रूप में भाग लिया। चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन सृजन फाउंडेशन की अधिवक्ता इंदु तोमर ने किया।
पैनल चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने विषय से जुड़े कई सवाल पूछे और सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाई। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए नशे से जुड़े जोखिम और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभावों को समझाया।
जागरूकता के साथ जिम्मेदार सोच विकसित करना उद्देश्य
कार्यक्रम के आयोजन में DMHP जयपुर के मनोरोग नर्सिंग अधिकारी संजय मित्तल का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य केवल युवाओं को शराब और अन्य नशे के नुकसान बताना नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उनमें संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करना भी रहा।
विशेषज्ञों ने युवाओं को अपनी समस्याओं पर खुलकर बात करने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर समय पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया।