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छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष का शाह से जवाब मांगने का दबाव

छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष का शाह से जवाब मांगने का दबाव

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन करते हुए छात्र आंदोलनों और सरकार से जुड़े कई मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता और एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा।

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen Z से जुड़े बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि युवाओं और छात्रों को लेकर वास्तव में चिंता है तो कथित पुलिस कार्रवाई पर भी स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए। उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में जवाब दें और छात्रों से माफी मांगें।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और अब प्रदर्शनकारी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को लेकर आरएसएस की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आनी चाहिए। हालांकि, ये सभी आरोप विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन का भी कांग्रेस नेताओं ने समर्थन किया। वेणुगोपाल ने कहा कि देश में जहां भी छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे, कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं और पार्टी आगे भी इन मामलों को संसद में उठाती रहेगी।

FCRA संशोधन विधेयक पर विरोध

एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने कहा कि जब संसद में सुचारु रूप से चर्चा नहीं हो पा रही है, तब इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्द पारित कराने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित बदलावों का असर गैर-सरकारी संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ सकता है। कांग्रेस ने विधेयक का विरोध जारी रखने की बात कही।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस अब सरकार और युवाओं के बीच पैदा हुए असंतोष को कम करने की कोशिश कर रहा है। तिवारी ने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें जायज हैं तो सरकार उन्हें स्वीकार क्यों नहीं करती। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से संसद में हुई घटनाओं को लेकर माफी की मांग भी दोहराई।

तिवारी ने शिक्षा के क्षेत्र में बजट बढ़ाने की मांग उठाते हुए कहा कि शिक्षा पर कुल बजट का 6 प्रतिशत खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से होना चाहिए।

झारखंड के छात्रों को लेकर भी सियासत

राहुल गांधी के रांची दौरे और जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के समर्थन पर तिवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों की जायज मांगों के समाधान के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने मामले पर बातचीत के लिए चार मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों का समूह बनाया है, जो बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश करेगा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के आरोपों पर जवाब देते हुए तिवारी ने कहा कि यदि सरकार भगवान राम से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा चाहती है तो विपक्ष इसके लिए तैयार है। उन्होंने भाजपा पर भगवान राम के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि युवाओं और देश के विकास की बात करने से पहले यह देखना जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में कितने लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी, गरीबों के भूमि अधिकार और सीवर-गटर में काम करने वाले श्रमिकों की मौत जैसे मुद्दों पर भी संसद में चर्चा की मांग की।

वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने राहुल गांधी के छात्र आंदोलनों के समर्थन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार छात्रों से संवाद करते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और उनके मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों को न्याय दिलाने और उनकी मांगों के समाधान के लिए आगे भी प्रयास करती रहेगी।

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