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इस्तांबुल में पाक-अफगान वार्ता बेनतीजा, मतभेद और गहराए

इस्तांबुल में पाक-अफगान वार्ता बेनतीजा, मतभेद और गहराए

इस्तांबुल। पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार देररात कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वार्ता समाप्त हो गई है। अब अगला दौर कब शुरू होगा यह अनिश्चित है। वार्ताकार दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने में विफल रहे। किस्तान-अफगानिस्तान वार्ता का तीसरा दौर गुरुवार को तुर्किये के इस्तांबुल में शुरू हुआ था। दोनों पक्षों ने बंद दरवाजों के पीछे बातचीत की। वार्ताकारों ने दोनों को शांति के लिए बहुत समझाया। बात नहीं बनी। पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल स्वदेश वापसी के लिए रवाना हो गया है। पाकिस्तान के डान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षामंत्री आसिफ ने जियो न्यूज के कार्यक्रम में कहा, "फिलहाल, जैसा कि हम बात कर रहे हैं, बातचीत समाप्त हो चुकी है।" इससे पहले, अधिकारियों और सूत्रों ने कहा था कि वार्ता बिना किसी समझौते के रुक गई। एक वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र ने संवाददाताओं को बताया, "इस्तांबुल में बातचीत गतिरोध में है।" पाकिस्तान-अफगानिस्तान वार्ता का तीसरा दौर गुरुवार को इस्तांबुल में शुरू हुआ और इसे दो दिनों तक जारी रखने की योजना थी। रक्षामंत्री ने कहा कि अफगान तालिबान प्रतिनिधिमंडल लिखित समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हुआ। वह केवल मौखिक समझौते की जिद पर अड़े रहे। आसिफ ने कहा कि इस्तांबुल से खाली हाथ लौटना दुखद है। आसिफ ने स्पष्ट किया कि युद्ध विराम फिलहाल लागू है। अगर अफगानिस्तान उल्लंघन करेगा तो पाकिस्तान माकूल जवाब देगा। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान की मुख्य मांग है: अफगान धरती से हमलों को रोकना। तीसरे दौर की वार्ता में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक के नेतृत्व में पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ सैन्य, खुफिया और विदेश कार्यालय के अधिकारी शामिल रहे। अफगान तालिबान पक्ष का नेतृत्व जनरल डायरेक्टरेट ऑफ इंटेलिजेंस (जीडीआई) के प्रमुख अब्दुल हक वासेक ने किया। उनके साथ सुहैल शाहीन, अनस हक्कानी और उप आंतरिक मंत्री रहमतुल्लाह नजीब थे। अक्टूबर की शुरुआत में सीमा पर हुई झड़पों के बाद वार्ता शुरू की गई थी। पहले और दूसरे दौर की वार्ता दोहा में ही। इस्तांबुल में वार्ता का मकसद निगरानी तंत्र के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था। इस्तांबुल से खबर है कि वार्ता विफल होने के बाद पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गया। शुक्रवार को दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई। दोनों पक्षों ने गुरुवार को कतर और तुर्किये के मध्यस्थों की उपस्थिति में आमने-सामने बैठक की थी। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं को बताया कि हमारे प्रतिनिधिमंडल ने अपना पक्ष व्यापक और साक्ष्य के साथ रखा। इस बीच, अफगान वार्ताकारों ने दावा किया कि उनके प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए तार्किक और आसानी से मानने योग्य हैं। उन्होंने इस्लामाबाद की मांगों को अवास्तविक और आक्रामक बताया और कहा कि ये आगे और जटिलताएं पैदा करने का बहाना बन सकते हैं। वार्ता के पहले दिन दोनों पक्षों ने तुर्किये और कतर के मध्यस्थों के साथ अपनी मांगें साझा कीं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने तीसरे दौर की वार्ता में एक बार फिर ऐसी मांगें उठाईं, जिनका उनके विचार में अफगानिस्तान से कोई संबंध नहीं है। पाकिस्तान की कथित मांगों में से एक टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सदस्यों को पाकिस्तान से अफगानिस्तान स्थानांतरित करना है। इसके जवाब में, अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात ने मांग की है कि पाकिस्तान अपनी धरती और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अन्य देशों या अफगानिस्तान के खिलाफ अभियानों के लिए न करे। राजनीतिक विश्लेषक अजीज मारेज ने कहा कि यह टिप्पणियां विरोधाभासी हैं। टीटीपी वास्तव में पाकिस्तान का आंतरिक मामला है।

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