दर्द के दूर करने के लिए फिजियोथेरेपी सबसे बेहतर इलाज
जीवनशैली में आये बदलाव के साथ ही बच्चे से बुजुर्ग तक शरीर के दर्द से परेशान हैं। हड्डी, नसें और शरीर
के जोड़ के दर्द दूर करने के लिए फिजियोथेरेपी सबसे बेहतर इलाज है। शारीरिक व्यायाम के जरिए शरीर की
मांसपेशियों को सही अनुपात में सक्रिय करने की विधा फिजियोथेरेपी कहलाती है। मानसिक तनाव,
घुटनों, पीठ या कमर में दर्द, गर्दन दर्द, कंधों का दर्द, जोड़ों का दर्द, एड़ियों का दर्द या कोहनी
का दर्द जैसे कई रोगों से बचने या निपटने के लिए बिना दवा खाए या चीरा लगवाए
फिजियोथेरेपी एक असरदार तरीका है। समय के साथ मशीनों के जरिये लोगों का दर्द दूर किया जा रहा
है। जरूरत से ज्यादा दर्द निवारक दवाइसों का सेवन करने से किडनी और शरीर के दूसरे अंगों पर इसका
असर पड़ता है। अक्सर देखा जाता है मरीज तभी फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाते हैं, जब दर्द असहनीय हो
जाता है। फिजियोथेरेपी कमजोर पड़ते मसल्स और नसों को मजबूत करता है। मांसपेशियों के अलावा नसों
के दर्द को भी दूर करने के लिए लोग फिजियोथेरेपी का सहारा ले रहे हैं।
फिजियोथैरेपी यानी शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हड्डियों-नसों के दर्द या तकलीफ वाले हिस्से की
वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक मशीनो, एक्सरसाइज, मोबिलाइजेशन,टेपिंग के माध्यम से मरीज को आराम
पहुंचाना। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि योगा और कसरतें ही फिजियोथैरेपी होती हैं लेकिन यह सही नहीं
है। फिजियोथैरेपी में विशेषज्ञ कई तरह के व्यायाम और नई तकनीक वाली मशीनों की मदद से इलाज करते
हैं। आज की जीवनशैली में हम लंबे समय तक अपनी शारीरिक प्रणालियों का सही ढंग से उपयोग नहीं कर
पा रहे हैं और जब शरीर की सहनशीलता नहीं रहती है तो वह तरह-तरह की बीमारियों व दर्द की चपेट में आ
जाता है। फिजियोथैरेपी को हम अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाकर दवाइयों पर निर्भरता कम करके स्वस्थ
रह सकते हैं।
फिजियोथेरेपी एक स्वास्थ्य प्रणाली है, जिसमे लोगों का परीक्षण कर उपचार किया जाता हैं।
फिजियोथेरेपी वह विज्ञान है जिसमें शरीर के अंगों को दवाइयों के बिना ही ठीक ढंग से कार्य कराया जाता है।
एक फिजियोथेरेपिस्ट का मुख्य काम शारीरिक कामों का आकलन, मेंटिनेंस और रिस्टोरेशन करना है।
फिजियोथेरेपिस्ट वाटर थेरेपी, मसाज आदि अनेक प्रक्रियाओं के द्वारा रोगी का उपचार करता है। दवा
रहित उपचार जिसमें मशीनों की सहायता से मांसपेशियों को रिलेक्स कर सूजन व दर्द में राहत दी जाती है।
मशीनी तरंगें दर्द वाले प्रभावित हिस्से पर सीधे काम करती हैं। इसमें ठंडा-गर्म सेक, मैकेनिकल ट्रैक्शन
(खिंचाव) से इलाज होता है।
फिजियोथेरेपी से कुछ दर्द में तो तुरंत आराम मिलता है, पर स्थायी परिणाम के लिए थोड़ा वक्त लग जाता
है। दर्द निवारक दवाओं की तरह इससे कुछ ही घंटों में असर नहीं दिखाई देता। खासकर फ्रोजन शोल्डर,
कमर व पीठ दर्द के मामलों में कई सिटिंग्स लेनी पड़ सकती हैं। कई मामलों में व्यायाम भी करना पड़ता है
और जीवनशैली में बदलाव भी। इलाज की कोई भी पद्धति तभी कारगर साबित होती है, जब उसका पूरा
कोर्स किया जाए। फिजियोथेरेपी के मामले में यह बात ज्यादा मायने रखती है। फिजियोथेरेपी में दर्द की
मूल वजहों को तलाशकर उस वजह को ही जड़ से खत्म कर दिया जाता है। मसलन यदि मांसपेशियों में
खिंचाव के कारण घुटनों में दर्द है तो स्ट्रेचिंग और व्यायाम के जरिये इलाज किया जाता है।
लाइफस्टाइल संबंधी परेशानी (मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज), क्लाइमेट चेंज से जुड़ी तकलीफें (लंबे
समय तक दफ्तर के एसी में रहना, धूप के बिना रहना, लंबी सिटिंग आदि, ऎसा वातावरण जो परेशानी को
बढ़ाता है), मैकेनिकल एवं ऑर्थोपेडिक डिसऑर्डर (पीठ, कमर, गर्दन, कंधे, घुटने का दर्द या दुर्घटना के
कारण भी), आहार-विहार (जोड़ों का दर्द, हार्मोनल बदलाव, पेट से जुड़ी समस्याएं), खेलकूद की चोटें, ऑर्गन
डिसऑर्डर, ऑपरेशन से जुड़ी समस्याएं, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां (मांसपेशियों का खिंचाव व उनकी
कमजोरी, नसों का दर्द व उनकी ताकत कम होना), चक्कर आना, कंपन, झनझनाहट, सुन्नपन और लकवा,
बढ़ती उम्र संबंधी बीमारियों के कारण चलने-फिरने में दिक्कत, बैलेंस बिगड़ना, टेंशन, हैडेक और अनिद्रा में
फिजियोथैरेपी को अपना सकते हैं।
फिजियोथैरेपी में तुरंत इलाज संभव नहीं होता। मरीज को धैर्य रखते हुए एक्सपर्ट के बताए अनुसार
व्यायाम करने और जीवनशैली में बदलाव लाने से न सिर्फ दीर्घकालिक लाभ होता है बल्कि एक्सरसाइज भी
उसकी जीवनशैली का नियमित हिस्सा बन जाते हैं। ये दोनों चीजें दवा रहित जीवन व बीमारियों को दूर
रखने में मददगार होती हैं।
-डॉ अरविन्द कुमार जागा