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"जब हम गरीब थे "काव्य संकलन पुस्तक का विमोचन विधिवत हुआ

पिलानी .  कवि के विवेक से बनी रचना कवि आज के अत्याधुनिक युग में नए-नए रचनाएं कर युवा पीढ़ी को ऊर्जावान बनाने में लगे हैं। वही शेखावाटी की धरा पर साधारण परिवार में जन्मे किशन खंडेलवाल जिनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में 4 अक्टूबर 1961 शेखावाटी की धारा पर हुआ ।शिक्षा के क्षेत्र में बाल्यावस्था से ही ऊर्जावान एवं जुझारू की झलक नजर आती थी ।वही बिरला पिलानी राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने का बड़ा दायित्व निभाया और तो और आज बदलते युग में किशन खंडेलवाल के मस्तिष्क की रेखाएं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनके द्वारा प्रकाशित बहुमूल्य शब्दों को माला में पिरो कर बनाई गई रचनाओं को एकत्रित करने का बड़ा दायित्व निभा रहा है ।जिसमें सर्वाधिक लोकप्रिय "दादाजी का कोट"  एवम "झरोखा " साथसाथ" व " ,झरोखा नामक काव्य की रचना सर्वाधिक लोकप्रिय रही। जिन्हें देखकर साहित्य के क्षेत्र में विशेष कार्य एवं उपलब्धियां प्राप्त होती रही और कवि रुकने का नाम ही ना लेकर निरंतर प्रगति के हर एक कदम में नया कुछ कर पाने की झलक लेकर निरंतर रचनाओं पर रचना मन की उपज विचारों से आज के बदलते युग में जनता की समस्याओं को अपने शब्दों के माध्यम से पटल पर रखना शायद कवि सोच को दर्शाता है ।आज तक राजभवन उड़ीसा साहित्यिक क्षेत्र में प्रमुख आयोजनों का संचालन कर हिंदी साहित्य समिति राजस्थान, कर्नाटक के द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया ।वहीं युवा ज्योति साहित्य सम्मान एवं साहित्य सभा सम्मान इंदौर, मां खंडेश्वरी सम्मान ,पंडित अनसूया प्रसाद पाठक हिंदी सेवा सम्मान, हिंदी कवि कल्पना सम्मान अंनगिनीत क्षेत्रों में सम्मानित होने का सौभाग्य मिला इन सभी सम्मान के पीछे पिलानी शिक्षा नगरी शेखावाटी अंचल की उपज से निकला यह नन्ना सा अंकुरित पौधा आज विशाल वट वृक्ष का रूप लेकर देश के कोने कोने में शब्दों की माला पहनता हुआ एक नई अलख जगाने का बड़ा दायित्व गत दिनों देखने का शुभ अवसर मिला जिसमें उड़ीसा के राज्यपाल महामहिम प्रो गणेशलाल के सानिध्य  मै  अपनी पुस्तक का विमोचन "जब मैं गरीब था" हिंदी कविता संग्रह का विधिवत लोकार्पण हुआ। ओडिशा गवर्नर हाउस महामहिम के सानिध्य में क्षेत्र के चिर परिचित साहित्यकारों के बीच साहित्यकार कवि किशन खांडल को महामहीम ने आशीर्वाद देते हुए निरंतर प्रगति की ओर बढ़ने की कामना की, कवि की रचना आज बाजार वाद द्वारा शिक्षा पद्धति लागू हो रही है या फिर साहित्य में साफ साफ नजर आ रहा है कि आज के बदलते युग में मोबाइल इंटरनेट साहित्य में प्रकाशन की स्पीड में चार चांद लगाते आधुनिक लैपटॉप और मोबाइल फोन की महत्वता को बढ़ा दिया है। शेखावाटी के वीर सपूत साहित्यकार कवि किशन खंडेलवाल को राजस्थान पिलानी प्रेस परिषद के वरिष्ठ पत्रकार कैलाशपति रुथला ने बताया कि प्रेस परिषद व खांडल विप्र समाज जयपुर ,राजस्थान ब्राहमण महासभा जयपुर ,खांडल विश्व परिषद पिलानी शाखा के तत्वाधान में आने वाले समय में भव्य सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाना सुनिआयोजित है  ।

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