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होलिका दहन की तैयारियां हुई शुरू 

होलिका दहन की तैयारियां हुई शुरू 

 
 
वैर  .  होली का महोत्सव पूरी उमंग के साथ फाल्गुन मास लगते ही शुरू हो जाती है, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को फूल का दहन होता है तथा उससे अगले दिन रंग गुलाल की होली खेली जाती है जिसे धूलंडी कहते हैं , मानसा के अनुसार  होलाष्टक लगते ही होलिका दहन की तैयारियां करने में  घरों में बालक बालिका एवं महिलाएं लग जाती है , धार्मिक परंपरा के अनुसार गाय के गोबर से बिलूरी  गुलरी,ढाल,होरा,होरी,नारियल,कंघा,,डोरा,,चंदा,  सूरज आदि बालक बालिका महिलाएं बनाने लग जाते हैं, 74 वर्षीय सरिता देवी ने बताया कि गाय के गोवर  से गुलरी,बलूरी  आदि को होलाष्टक लगते ही  बनाना शुरू कर देते हैं,  सूखने के बाद होली के दिन इनको मालाओ  में पिरो कर एक जगह एकत्रित कर लिया जाता है  तथा  शुभ मुहूर्त में हरी दूब, अक्षत, फल-फूल  रोली,कलाया आदि  से इनकी पूजा की जाती है तत्पश्चात घर की बालिकाएं एवं युवक गुलरी से बनी मालाओ को तलवार नुमा खाड़े  में लगाकर होलिका दहन  स्थल पर ले जाया जाता है, इनमें से एक एक  माला मंदिर,  धार्मिक स्थलों पर रखकर घर परिवार की सुख समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की जाती है, एक जगह इकट्ठी हुई होली को गांव के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में चंग ठाप के साथ होली के भजन व रसिया  गाते हुए होलिका दहन किया जाता है | होलिका दहन के समय नए अन्न  की बालियां को जलती आंच पर भून आ जाता है तथा दानों को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है, मान्यता के अनुसार होलिका दहन की राख  रज को शरीर पर लगाने से कई कष्टों का निवारण होता है | 

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