राजघाट पहुंचे लिकटेंस्टीन के युवराज एलोइस, गांधीजी को किया नमन
नई दिल्ली। लिकटेंस्टीन के युवराज एलोइस ने मंगलवार को दिल्ली के राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत की राजकीय यात्रा पर आए युवराज ने गांधीजी के शांति और अहिंसा के संदेश को याद किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि गांधीजी की विरासत आज भी प्रासंगिक है।
इससे पहले युवराज एलोइस और उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफिया ने हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा हुई।
व्यापार और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और युवराज एलोइस के बीच बातचीत में व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।
भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने में भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते की भूमिका भी चर्चा का अहम हिस्सा रही। इस समझौते से व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी युवराज एलोइस से मुलाकात की। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और ईएफटीए समझौते के तहत उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन की साझेदारी कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है और समझौते से मिलने वाले अवसर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत
युवराज एलोइस का मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। युवराज ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर प्रसन्नता जताते हुए इसे सम्मान का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश की यात्रा करना उनके लिए गौरव की बात है। युवराज के अनुसार, यह ऐतिहासिक दौरा दर्शाता है कि लिकटेंस्टीन भारत के साथ अपने रिश्तों को कितना महत्व देता है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
युवराज की यात्रा के दौरान हुई इन मुलाकातों से भारत और लिकटेंस्टीन के बीच कूटनीतिक संवाद के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया। अब दोनों देशों के बीच चर्चा में सामने आए अवसरों को व्यावहारिक साझेदारी में बदलने पर ध्यान रहेगा।