रबी फसलों की खरीद में उछाल, MSP भुगतान 8.36 लाख करोड़ के पार
नई दिल्ली। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी बढ़ रही है। आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2004-05 की तुलना में 2025-26 में छह रबी फसलों की सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस दौरान खरीद 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई।
इसी अवधि में किसानों को एमएसपी के तहत किया जाने वाला भुगतान 2.65 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। सरकार का कहना है कि खरीद व्यवस्था का विस्तार और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किसानों की बाजार तक पहुंच को आसान बनाने के साथ भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ा रहा है।
रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को सभी निर्धारित रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। अनुमान है कि इस सत्र में 324 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद के बदले किसानों को करीब 90,962 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। एमएसपी बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना और उन्हें फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है।
कुसुम के एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
इस बार एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम के लिए की गई है। इसके समर्थन मूल्य में 675 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। रेपसीड और सरसों के एमएसपी में 413 रुपए, मसूर में 390 रुपए और जौ में 136 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। गेहूं और चना के समर्थन मूल्य में भी पिछले वर्ष के मुकाबले इजाफा किया गया है।
फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन लागत के मुकाबले अनुमानित रिटर्न में गेहूं को 106 प्रतिशत का मार्जिन मिलने का अनुमान है। रेपसीड और सरसों के लिए यह 96 प्रतिशत, मसूर के लिए 92 प्रतिशत और चना के लिए 59 प्रतिशत बताया गया है।
सरकार हर साल 22 प्रमुख कृषि फसलों के लिए एमएसपी घोषित करती है। इसके लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों को आधार बनाया जाता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से खरीद और भुगतान को बढ़ावा
सरकारी खरीद व्यवस्था में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। 19 अक्टूबर 2026 तक ई-संयुक्त प्लेटफॉर्म के जरिए 43 लाख से अधिक किसानों से उपज खरीदी गई। इस माध्यम से 37.45 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उपज की खरीद हुई और किसानों के बैंक खातों में 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा की गई।
वहीं, ई-समृद्धि प्लेटफॉर्म पर 1.37 करोड़ से ज्यादा किसान पंजीकृत हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 2.25 करोड़ यूनिट से अधिक उपज की खरीद दर्ज की गई और किसानों को 81 लाख से ज्यादा बार भुगतान किया गया।
सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, मूल्य की गारंटी, खरीद का विस्तार और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था किसानों को बाजार से जोड़ने में मदद कर रही है। इससे कृषि संबंधी फैसले लेने में भी किसानों का भरोसा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।